संभल
क्या उत्तरप्रदेश (UP) के संभल (Sambhal) की शाही जामा मस्जिद (Shahi Jama Masjid) को प्राचीन हिंदू मंदिर को ध्वस्त करके बनाया गया था? इसे लेकर कुछ ऐतिहासिक साक्ष्य सामने आए हैं। यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह मस्जिद वास्तव में एक प्राचीन हिंदू मंदिर को ध्वस्त करके बनाई गई थी। इसे लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की 1875 की रिपोर्ट ने कई चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे।
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आपको बता दें कि संभल में जामा मस्जिद के सर्वे को लेकर रविवार को हिंसा भड़क गई थी जिसमें चार लोगों की जान चली गई थी और कई पुलिसकर्मियों सहित करीब 20 लोग घायल हो गए। नाराज भीड़ ने पुलिस पर पथराव और आगजनी की, जिसके बाद हालात काबू में करने के लिए पुलिस को आंसू गैस और लाठीचार्ज करना पड़ा। संभल जिले की शाही जामा मस्जिद को हरिहर मंदिर बताने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने मस्जिद के सर्वे का आदेश दिया था। पहले 19 नवंबर को रात में सर्वे हुआ और 24 नवंबर (रविवार) को दूसरी बार सर्वे मस्जिद कमेटी की सहमति से दोनों पक्षों की मौजूदगी में सर्वे होना था, लेकिन मस्जिद के सर्वे के खिलाफ बड़ी संख्या में लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। कोर्ट के आदेश पर जब सर्वे शुरू हुआ तो भीड़ ने भड़ककर पुलिस पर हमला कर दिया, पथराव किया और कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया। हालांकि सर्वे टीम ने अपना काम पूरा कर लिया है और रिपोर्ट 29 नवंबर को अदालत में पेश की जाएगी, जिस पर सभी पक्षों को अपनी राय देने का मौका मिलेगा।
साक्ष्य किस ओर कर रहे हैं इशारा?
इस बीच संभल की इस शाही जामा मस्जिद को लेकर कुछ ऐतिहासिक साक्ष्य सामने आए हैं जिनसे यह संकेत मिले हैं कि प्राचीन मंदिर को तोड़कर इस मस्जिद का निर्माण किया गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की 1875 की रिपोर्ट सामने आई है जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्यों का खुलासा हुआ है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के तत्कालीन अधिकारी एसीएल कार्लाइल (A. C. L. Carlleyle) द्वारा या रिपोर्ट तैयार की गई थी और “Tours in the Central Doab and Gorakhpur 1874–1875 and 1875–1876” शीर्षक के तहत प्रकाशित हुई। रिपोर्ट में मस्जिद के अंदर और बाहर के खंभों को पुराने हिंदू मंदिरों का बताया गया है, जिन्हें प्लास्टर लगाकर छिपाने का प्रयास किया गया। मस्जिद के एक खंभे से प्लास्टर हटने पर लाल रंग के प्राचीन खंभे दिखाई दिए, जो हिंदू मंदिरों में इस्तेमाल होने वाले डिज़ाइन और संरचना के थे। ASI के सर्वेक्षण में दावा किया गया कि मस्जिद में ऐसे कई संकेत और अवशेष मौजूद हैं जो इसकी प्राचीनता और हिंदू मंदिर से जुड़े होने की ओर इशारा करते हैं। यह मामला अब अदालत में विचाराधीन है और हाल ही में कराए गए सर्वे को 29 नवंबर को अदालत में पेश किया जाएगा।
हिंदू पक्ष का दावा है कि एक प्राचीन हिंदू मंदिर को तोड़कर यह मस्जिद बनाई गई थी। हिंदू पक्ष ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और ऐतिहासिक साक्ष्यों से जोड़ कर अपना दावा प्रस्तुत किया है। हिंदू पक्ष का दावा है कि इसे भगवान विष्णु के मंदिर को तोड़कर बनाया गया था। इस दावे का आधार बाबरनामा और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट को माना जा रहा है।
शिलालेख में बताया हिंदू मंदिर
ASI की 1875 की रिपोर्ट में इस मस्जिद में मौजूद एक शिलालेख का उल्लेख सबसे बड़ा प्रमाण बताया गया है। इस शिलालेख है में लिखा है कि इसका निर्माण 933 हिजरी में मीर हिंदू बेग ने पूरा किया था। मीर हिंदू बेग बाबर का दरबारी था, जिसने एक हिंदू मंदिर को मस्जिद में परिवर्तित किया। ASI के मुताबिक, यह शिलालेख इस बात का प्रमाण है कि मस्जिद का निर्माण किसी हिंदू धार्मिक स्थल को बदलकर किया गया था।
ASI की 1875 की रिपोर्ट के अनुसार मस्जिद के हिंदू खंभे मुस्लिम खंभों से अलग हैं और विशुद्ध हिंदू वास्तुकला का प्रतीक हैं। ASI के अनुसार, मस्जिद के गुंबद का जीर्णोद्धार हिंदू सम्राट पृथ्वीराज चौहान के शासनकाल में हुआ था। मस्जिद की संरचना में हिंदू मंदिर के कई चिह्न पाए गए, जिन्हें बाद में प्लास्टर से ढक दिया गया।
हिंदू पक्ष की याचिका में बाबरनामा का जिक्र
हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ता हरिशंकर जैन ने अपनी याचिका में बाबरनामा का जिक्र किया है। बाबरनामा, जिसे बाबर ने खुद लिखा था और ब्रिटिश ओरिएंटलिस्ट एनेट बेवरिज ने अनुवाद किया, के पृष्ठ 687 पर लिखा है कि बाबर के आदेश पर उसके दरबारी मीर हिंदू बेग ने संभल के हिंदू मंदिर को जामा मस्जिद में परिवर्तित किया। यह विवरण शिलालेख से मेल खाता है, जिसमें मीर हिंदू बेग का नाम और 933 हिजरी वर्ष में मस्जिद के निर्माण का उल्लेख है।
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