रेट्रोस्पेक्टिव प्रमोशन पर ‘नो वर्क नो पे’ नहीं चलेगा | हाईकोर्ट बोला—अफसरों की गलती का खामियाजा कर्मचारी क्यों भुगते?

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab Haryana High Court) ने कहा कि यदि कर्मचारी (Employee) को प्रशासनिक गलती से समय पर प्रमोशन नहीं मिला और बाद में रेट्रोस्पेक्टिव प्रमोशन दिया गया, तो “नो वर्क नो पे” का हवाला देकर वेतन के एरियर से इंकार नहीं किया जा सकता।

चंडीगढ़ 

अगर किसी कर्मचारी को विभाग की गलती से समय पर प्रमोशन नहीं मिला और बाद में उसे पिछली तारीख से पदोन्नति दी गई, तो सरकार या विभाग ‘नो वर्क नो पे’ का बहाना बनाकर उसके वेतन के बकाए से हाथ नहीं झाड़ सकता। यह साफ संदेश Punjab and Haryana High Court ने एक अहम फैसले में दिया है।
हाईकोर्ट ने एक सरकारी कर्मचारी की याचिका मंजूर करते हुए विभाग के उन आदेशों को खारिज कर दिया, जिनमें उसे पिछली तारीख से प्रमोशन तो दे दिया गया था, लेकिन उस अवधि की सैलरी और अन्य वित्तीय लाभ देने से इंकार कर दिया गया था।

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति Sandeep Moudgil ने कहा कि ‘नो वर्क नो पे’ कोई कठोर या अंतिम नियम नहीं है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले Union of India vs K.V. Jankiraman (1991) का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि यह सिद्धांत उन मामलों में लागू नहीं होता, जहां कर्मचारी काम करने को तैयार था लेकिन प्रशासनिक चूक के कारण उसे काम करने का अवसर ही नहीं मिला।

अदालत ने कहा कि किसी कर्मचारी को सिर्फ इसलिए नुकसान में नहीं रखा जा सकता क्योंकि विभाग ने गलती की। यदि बाद में यह मान लिया गया है कि कर्मचारी पहले ही प्रमोशन का हकदार था, तो उसे उसी स्थिति में वापस लाना होगा, जिसमें वह उस गलती के बिना होता।

जूनियर्स आगे बढ़ गए, कर्मचारी पीछे रह गया

मामले में याचिकाकर्ता ने बताया कि वह 24 अप्रैल 1987 को नरवाना में पीआर चौकीदार के रूप में डेली वेज पर विभाग में शामिल हुआ था। उसकी सेवा 1 अप्रैल 1993 से नियमित कर दी गई। बाद में उसे 2011 में क्लर्क और 2014 में सब-इंस्पेक्टर के पद पर पदोन्नति मिली।

लेकिन उसके कई जूनियर अधिकारियों—जिनमें सतबीर सिंह भी शामिल थे—को उससे पहले ही सब-इंस्पेक्टर और फिर इंस्पेक्टर के पद पर प्रमोट कर दिया गया। इसे भेदभाव बताते हुए कर्मचारी ने 2017 में विभाग के सामने प्रतिनिधित्व दिया और अपने जूनियर्स के प्रमोशन की तारीख से पदोन्नति और उससे जुड़े लाभ देने की मांग की।

जांच में सही पाया गया दावा

मामले की जांच के बाद राज्य सरकार ने स्वीकार किया कि कर्मचारी को पहले प्रमोशन मिलना चाहिए था। इसके बाद 4 सितंबर 2020 और 12 नवंबर 2020 के आदेशों के जरिए उसे क्लर्क, सब-इंस्पेक्टर और इंस्पेक्टर के पद पर क्रमशः 9 सितंबर 2008, 20 अप्रैल 2012 और 17 जून 2016 से पदोन्नति की मानी गई तारीखें दे दी गईं।

हालांकि विभाग ने यह कहते हुए वेतन के एरियर देने से इनकार कर दिया कि कर्मचारी ने उस अवधि में वास्तव में इन पदों पर काम नहीं किया था।

अदालत ने कहा—यह तर्क टिक नहीं सकता

हाईकोर्ट ने विभाग के इस तर्क को ‘मैकेनिकल’ बताते हुए खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि जब विभाग खुद मान चुका है कि कर्मचारी को पहले ही प्रमोशन मिलना चाहिए था, तो वित्तीय लाभ देने से इनकार करना राज्य को अपनी ही गलती का फायदा उठाने देने जैसा होगा।

अदालत ने यह भी कहा कि राज्य एक ‘मॉडल एम्प्लॉयर’ है और उससे निष्पक्ष व्यवहार की उम्मीद की जाती है। यदि प्रशासनिक गलती को सुधारने के लिए पिछली तारीख से प्रमोशन दिया गया है, तो जहां तक संभव हो कर्मचारी को उसी आर्थिक स्थिति में लाना होगा जिसमें वह उस गलती के बिना होता।

सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला

फैसले में अदालत ने State of Kerala vs E.K. Bhaskaran Pillai (2007), Ramesh Kumar vs Union of India (2015) और North Delhi Municipal Corporation vs Ram Naresh Sharma (2021) जैसे मामलों का हवाला देते हुए दोहराया कि “नो वर्क नो पे” का सिद्धांत हर परिस्थिति में लागू नहीं किया जा सकता।

अदालत ने विभागीय आदेशों में लगाए गए क्लॉज हटाते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि कर्मचारी को उसके डीम्ड प्रमोशन के आधार पर सभी वित्तीय लाभ दिए जाएं। साथ ही 9 सितंबर 2008 से क्लर्क, 20 अप्रैल 2012 से सब-इंस्पेक्टर और 17 जून 2016 से इंस्पेक्टर के पद के अनुसार उसकी सैलरी दोबारा तय कर बकाया भुगतान किया जाए।

नई हवा खबरें अपने मोबाइल पर नियमित और डायरेक्ट प्राप्त करने  के लिए व्हाट्सएप नंबर 9460426838 सेव करें और ‘Hi’ और अपना नाम, स्टेट और सिटी लिखकर मैसेज करें। आप अपनी खबर या रचना भी इस नंबर पर भेज सकते हैं।

खून की कमी चुपचाप वार करती है | आयरन की गोली बेअसर क्यों? आदतें बदलें, हीमोग्लोबिन खुद बढ़ेगा

‘दिनदहाड़े न्यायिक हत्या’ | हाई कोर्ट ने जज पर साधा निशाना, फैसले को बताया गंभीर कदाचार

‘नई हवा’ की खबरों को Subscribe करने के लिए हमारे WhatsApp Channel से जुड़ें।