कम वैज्ञानिक, लेकिन कमाल का काम | MPUAT की रिसर्च काउंसिल मीटिंग में नई खेती तकनीक और कमाई मॉडल पर बड़ा फोकस

उदयपुर के MPUAT में अनुसंधान परिषद की 22वीं बैठक, नई कृषि तकनीक, बायोपॉलिमर रिसर्च और आय बढ़ाने वाले मॉडल पर जोर।

उदयपुर 

राजस्थान के उदयपुर में शुक्रवार को कृषि अनुसंधान को लेकर बड़ी मंथन बैठक हुई। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MPUAT) की अनुसंधान परिषद् की 22वीं बैठक 24 अप्रैल 2026 को अनुसंधान निदेशालय में कुलगुरू डॉ. प्रताप सिंह की अध्यक्षता में आयोजित की गई।

यह बैठक सिर्फ औपचारिक नहीं थी—यह आने वाले वर्षों की कृषि दिशा तय करने का मंच बनी। सालभर के अनुसंधान कार्यों की समीक्षा, मूल्यांकन और भविष्य की रणनीति पर गहन चर्चा हुई। बैठक में देश के दिग्गज कृषि वैज्ञानिक भी शामिल हुए— डॉ. रवि कुमार माथुर (भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद) और डॉ. देव व्रत सिंह (भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर)।

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कम संसाधन, लेकिन बड़ी उपलब्धियां

कुलगुरू डॉ. प्रताप सिंह ने साफ कहा—विश्वविद्यालय सीमित वैज्ञानिक संसाधनों के बावजूद कृषि अनुसंधान में अपनी अलग पहचान बना रहा है। नई फसल किस्मों का विकास, गुणवत्ता शोध प्रकाशन और राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान—ये सब इसकी उपलब्धियों का प्रमाण हैं। पिछले दो वर्षों (2024-25) में विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों को 8 व्यक्तिगत सम्मान और 2 परियोजनाओं को राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं।

अब रिसर्च से ‘इनकम’ भी लक्ष्य

डॉ. प्रताप सिंह ने वैज्ञानिकों को साफ संदेश दिया—अब अनुसंधान सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उसे स्टेकहोल्डर्स (किसान, बाजार, उपभोक्ता) की जरूरतों के हिसाब से तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि नई तकनीकों और पेटेंट्स के जरिए विश्वविद्यालय की आय बढ़ाने पर भी फोकस किया जाए।

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एक्सपर्ट्स ने दिए बड़े सुझाव

डॉ. रवि कुमार माथुर ने वैज्ञानिकों को बायोपॉलिमर रिसर्च में सहयोग बढ़ाने की सलाह दी।
साथ ही उन्होंने समन्वित कृषि प्रणाली, तकनीक का प्रभाव विश्लेषण, पेटेंट का व्यवसायिकरण और संरक्षित खेती पर रिसर्च को जरूरी बताया। वहीं डॉ. देव व्रत सिंह ने कहा कि किसानों के काम आने वाली मशीनों को स्थानीय जरूरतों के हिसाब से मॉडिफाई कर ज्यादा प्रभावी बनाया जा सकता है।
उन्होंने एक अहम बात भी कही—
“कृषि शिक्षा को नौकरी नहीं, जुनून समझकर अपनाएं।”

91 परियोजनाओं पर चल रहा काम

बैठक की शुरुआत में अनुसंधान निदेशक डॉ. अरविंद वर्मा ने जानकारी दी कि विश्वविद्यालय में इस समय 31 अखिल भारतीय समन्वित परियोजनाओं सहित कुल 91 रिसर्च प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है।
साथ ही पिछले 2 वर्षों के अनुसंधान कार्यों और 21वीं बैठक के निर्णयों की अनुपालना रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई।

तकनीकी बुलेटिन का विमोचन

बैठक के दौरान राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत तैयार तकनीकी प्रगति बुलेटिन का भी विमोचन किया गया।
इस मौके पर डॉ. देव व्रत सिंह, पूर्व प्रधान वैज्ञानिक (फार्म मशीनरी) भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर सहित विश्वविद्यालय के निदेशक, अधिष्ठाता, क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्रों के प्रमुख, विभागाध्यक्ष और राजस्थान कृषि विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

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