पोषित करें सद्भाव…

ये दुनिया नहीं है विश्राम स्थल अभीष्ट कर्मों का ये कर्म स्थल अद्वितीय इसका हर एक कण इनके सदुपयोग का लें हम प्रण

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लॉ के प्रोफ़ेसर साहब ने स्टूडेंट्स को ऐसे सिखाया सबब 

लाॅ की क्लास में लेक्चरर ने एक छात्र को खड़ा करके उसका नाम पूछा और बिना किसी वजह के उसे क्लास से निकल जाने का कह दिया। छात्र ने कारण जानने और

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राघव आ जाओ तुम दुबारा, आज भी याद तुम्हारी आती है | डा.रांगेय राघव जयंती

उत्तरप्रदेश एवं ब्रज अंचल की यमुना नदी किनारे आगरा की धरा में जन्मे रांगेय राघव पर ज्ञान की देवी मां शारदा की आसीम कृपा थी, जो दक्षिणी भारतीय परिवार के सदस्य होते हुए भी हिन्दी साहित्य में अनूठी छाप छोड़ी।

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