केसू बड़े कमल के फूल मेरी झांझी ऐ ब्याहन आए

झांझी शब्द, सांझी का अपभ्रंश है या कि नहीं यह मेरे लिए यक्षप्रश्न है ? मेरा बचपन अटूट ब्रज संस्कृति से पोषित है । कल अमावस के अपराह्न, संध्या से पूर्व ही हमारे यहाॅं दीवार पर गाय के

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पुकार…

हे आशुतोष मुझे अपना लो अपने जैसा मुझे बना लो

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दौसा के अंजीव अंजुम को हिंदी संस्थान लखनऊ का कृष्ण विनायक फड़के बाल साहित्य समीक्षा सम्मान

दौसा के वरिष्ठ बाल साहित्यकार डॉ. अंजीव अंजुम को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ द्वारा संचालित बाल साहित्य संवर्धन योजना के अंतर्गत राज्य के अन्य आठ बाल

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