राजस्थान हाईकोर्ट के बड़े फैसले में सस्पेंड सिविल जज वंदना शर्मा की बहाली, बालकृष्ण मिश्रा का ट्रांसफर और कई न्यायिक अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार।
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सरकारी अफसरों पर यूं ही नहीं दर्ज होगी FIR | हाईकोर्ट ने कहा—पहले सुनवाई, फिर वरिष्ठ की रिपोर्ट… तभी आगे बढ़ेगा मुकदमा
राजस्थान हाईकोर्ट ने BNSS की धारा 223 की व्याख्या करते हुए कहा कि अब किसी भी सरकारी अधिकारी के खिलाफ सीधे FIR दर्ज नहीं की जा सकती। पहले अधिकारी को सुनवाई का मौका और वरिष्ठ से तथ्यात्मक रिपोर्ट लेना जरूरी होगा।
हाईकोर्ट का बड़ा एक्शन; सीनियर सिविल जज सस्पेंड, आखिर क्यों गिरी गाज?
राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन ने सीनियर सिविल जज श्रवण कुमार मीणा को निलंबित कर दिया है। उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित है और निलंबन अवधि में मुख्यालय जोधपुर रखा गया है।
पेपरलीक की स्याही में डूबी पूरी भर्ती | हाईकोर्ट ने रद्द की SI भर्ती-2021, हजारों चयनितों के सपने फिर अधर में
राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पेपरलीक और धांधली के चलते SI भर्ती-2021 को रद्द कर दिया। 3.8 लाख अभ्यर्थियों वाली इस भर्ती पर कोर्ट ने कहा कि दूषित प्रक्रिया को जारी नहीं रखा जा सकता।
रिटायरमेंट के दिन ही बर्खास्त! | 37 साल की नौकरी के बाद PNB अधिकारी को सबसे कड़ी सजा क्यों? हाईकोर्ट ने उठाए सवाल
पंजाब नेशनल बैंक के अधिकारी पी.के. वरुण को 37 साल की सेवा के बाद रिटायरमेंट के दिन बर्खास्त कर दिया गया। दिल्ली हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि एक ही मामले में सबसे कड़ी सजा सिर्फ उन्हें क्यों दी गई।
धर्म बदला तो क्या रहेगा SC का हक? | सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दी कानूनी रेखा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि अनुसूचित जाति का व्यक्ति हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म छोड़कर किसी अन्य धर्म को अपनाता है, तो उसे एससी का दर्जा और उससे जुड़े कानूनी लाभ नहीं मिलेंगे।
सुबह-सुबह क्यों खुलेंगी अदालतें? | राजस्थान में 13 अप्रैल से बदल जाएगी कोर्ट की घड़ी
राजस्थान हाईकोर्ट और प्रदेश की सभी अधीनस्थ अदालतों में 13 अप्रैल से ग्रीष्मकालीन समय-सारिणी लागू होगी। अब अदालतों में सुनवाई सुबह 8 बजे से शुरू होगी, यह व्यवस्था 28 जून तक प्रभावी रहेगी।
‘घर से काम नहीं, ऑफिस आओ…’ | प्रेग्नेंट कर्मचारी को WFH न देने पर कोर्ट ने कंपनी पर ₹200 करोड़ ठोका
अमेरिका के ओहायो में प्रेग्नेंट कर्मचारी को वर्क फ्रॉम होम की अनुमति न देने के मामले में कोर्ट ने कंपनी पर 2.25 करोड़ डॉलर (करीब ₹200 करोड़) का जुर्माना लगाया। समय से पहले डिलीवरी के बाद नवजात की मौत हो गई थी।
11 साल से ‘जिंदा’ मानकर चलता रहा केस | जज ने कहा—वीडियो कॉल पर पेश करो… पता चला, पीड़ित 2015 में ही मर चुका!
गुजरात हाईकोर्ट में हैरान करने वाला खुलासा—जिस व्यक्ति के नाम पर मुआवजे का केस चल रहा था, उसकी 2015 में ही मौत हो चुकी थी। 11 साल बाद अदालत में सामने आया सच।
गोद लेने वाली महिलाओं को भी पूरा मातृत्व अधिकार | सुप्रीम कोर्ट ने कहा—अब हर एडॉप्टिव मदर को मिलेगा 12 हफ्ते का अवकाश
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि बच्चा गोद लेने वाली महिला कर्मचारियों को भी 12 हफ्ते का मातृत्व अवकाश मिलेगा। उम्र के आधार पर किया गया भेदभाव असंवैधानिक करार।
