ओडिशा (Odisha) के क्योंझर (Keonjhar) में 20 हजार रुपये निकालने के लिए भाई अपनी बहन का कंकाल कंधे पर रख बैंक पहुंच गया। जानिए पूरी दिल दहला देने वाली घटना।
क्योंझर
ओडिशा के क्योंझर में सोमवार का दिन… और एक ऐसा मंजर, जिसे देखने वालों की आंखें ठहर गईं।
बैंक के बरामदे में एक आदमी आया—थका हुआ, चुप… और उसके कंधे पर जो था, उसने पूरे माहौल को सन्न कर दिया। वह अपनी बहन का कंकाल लेकर आया था।
यह कहानी है डियानाली गांव के आदिवासी जीतू मुंडा की—जिसके लिए 20 हजार रुपये सिर्फ रकम नहीं, जिंदगी चलाने का सहारा थे।
‘खाता धारक को लाओ’… और वही बात चुभ गई
जीतू कई दिनों से ओडिशा ग्रामीण बैंक की मल्लिपसी शाखा के चक्कर काट रहा था।
वह बार-बार बैंककर्मियों को समझाता—’बहन अब नहीं रही…’
लेकिन हर बार एक ही जवाब—’खाता धारक को लेकर आओ।’
कानूनी शब्द, नियम, नॉमिनी… ये सब जीतू की दुनिया के बाहर की बातें थीं। उसके लिए बस इतना सच था—बहन के खाते में पैसे हैं, और उसे उनकी जरूरत है।
कब्र तक गया… और वापस अकेला नहीं लौटा
एक दिन वही लाइन उसके दिमाग में अटक गई—’खुद आओ…’
और फिर वह सच में कब्र तक पहुंच गया।
26 जनवरी 2026 को मर चुकी बहन कालरा मुंडा की कब्र खोदी गई… और जीतू उसे कंधे पर उठाकर चल पड़ा।
करीब 3 किलोमीटर पैदल… बिना कुछ बोले, बिना रुके।
बैंक में रखा कंकाल… और ठहर गया वक्त
मल्लिपसी शाखा के बरामदे में जैसे ही उसने कंकाल उतारा, वहां मौजूद लोग जड़ हो गए।
कुछ पीछे हटे, कुछ ने मुंह ढक लिया… और कुछ बस देखते रह गए—कि ये सच है या कोई डरावना सपना।
एक भाई, अपनी बहन को इस हाल में बैंक तक ले आया था—सिर्फ इसलिए कि उसे यकीन दिला सके, ‘वो अब नहीं रही…’
सिस्टम समझा नहीं पाया… और वो नियम नहीं समझ पाया
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची।
अधिकारियों ने साफ किया—जीतू अनपढ़ है, उसे नॉमिनी या कानूनी वारिस जैसी प्रक्रियाओं की कोई जानकारी नहीं।
दूसरी तरफ, बैंक भी उसे ये आसान भाषा में समझा नहीं पाया कि पैसे कैसे निकलेंगे।
यहीं, एक सीधी-सी बात… एक डरावनी घटना बन गई।
पूरा परिवार खत्म… अब वही आखिरी सहारा
कालरा मुंडा के खाते में जमा 20 हजार रुपये के लिए नामित पति और बेटे—दोनों की पहले ही मौत हो चुकी थी।
अब इस पैसे का एकमात्र हकदार जीतू ही बचा था।
उसकी आर्थिक हालत ऐसी कि यही रकम उसके लिए रोज़मर्रा की जिंदगी का सहारा बन सकती थी।
आखिर में भरोसा… और फिर से दफन
पुलिस ने जीतू को भरोसा दिलाया—उसे पूरी कानूनी प्रक्रिया समझाकर पैसे दिलवाए जाएंगे।
इसके बाद, पुलिस की मौजूदगी में बहन के कंकाल को फिर से कब्र में दफना दिया गया।
लेकिन इस घटना ने एक सवाल छोड़ दिया—
क्या नियम इतने भारी हो सकते हैं कि एक भाई को अपनी बहन का कंकाल उठाकर बैंक तक आना पड़े?
नई हवा खबरें अपने मोबाइल पर नियमित और डायरेक्ट प्राप्त करने के लिए व्हाट्सएप नंबर 9460426838 सेव करें और ‘Hi’ और अपना नाम, स्टेट और सिटी लिखकर मैसेज करें। आप अपनी खबर या रचना भी इस नंबर पर भेज सकते हैं।
अब नहीं आएगा बुढ़ापा? | शरीर की ‘एजिंग मशीन’ बंद करने वाली जीन दवा पर बड़ा खुलासा
‘नई हवा’ की खबरों से जुड़ने के लिए हमारे WhatsApp Channel को follow करें ।
