4.20 करोड़ का SBI लोन घोटाला | बैंक के अंदर से ही तैयार हुआ फर्जीवाड़े का खेल, मैनेजर–असिस्टेंट मैनेजर गिरफ्तार

जयपुर (Jaipur) में SBI बैंक की बीस दुकान शाखा में 4.20 करोड़ रुपये के लोन घोटाले का खुलासा हुआ है। बैंक मैनेजर और असिस्टेंट मैनेजर को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर संगठित धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

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जयपुर 

जयपुर की बैंकिंग व्यवस्था को हिला देने वाला एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जहां भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की एक शाखा में ही बैठे जिम्मेदार अधिकारियों ने कथित तौर पर संगठित गिरोह के साथ मिलकर 4 करोड़ 20 लाख रुपये से अधिक का लोन घोटाला कर डाला।

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मामला वर्ष 2023 में एसबीआई बैंक शाखा ‘बीस दुकान’, आदर्श नगर, जयपुर का है, जहां फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी कर्मचारियों के नाम पर कूटरचित पहचान तैयार की गई और उसी के जरिए बैंक से मोटी रकम के लोन स्वीकृत कराए गए।

पुलिस जांच में सामने आया है कि बैंक के ही मैनेजर और असिस्टेंट बैंक मैनेजर ने इस पूरे खेल में अहम भूमिका निभाई।

फर्जी दस्तावेजों से लोन मंजूरी, अंदरूनी मिलीभगत का खुलासा

पुलिस के अनुसार आरोपियों ने फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और सैलरी स्लिप जैसे दस्तावेजों को असली बताकर सत्यापित किया और अलग-अलग ग्राहकों के नाम पर करीब 4.20 करोड़ रुपये से अधिक का लोन पास कर दिया। यह पूरा खेल एक संगठित आपराधिक गिरोह के साथ मिलकर सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया।

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37 मामले दर्ज, लंबे समय से चल रही थी जांच

मोती डूंगरी थाना अधिकारी मोहन सिंह ने बताया कि इस पूरे घोटाले से जुड़े अब तक कुल 37 प्रकरण दर्ज किए जा चुके हैं और विस्तृत जांच जारी है। जांच में यह भी सामने आया कि बैंक मैनेजर ने स्वयं ही इन मामलों की शिकायत थाने में दर्ज कराई थी, जिसमें दावा किया गया था कि ग्राहकों ने फर्जी सरकारी पहचान पत्र बनाकर लोन लिया है।

इन दो अधिकारियों की हुई गिरफ्तारी

डीसीपी ईस्ट रंजीता शर्मा के अनुसार, इस मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने मुख्य आरोपी और बैंक अधिकारी को गिरफ्तार किया है—

  • बैंक मैनेजर बाबूलाल मीणा (निवासी बस्सी, जयपुर)
  • असिस्टेंट बैंक मैनेजर आकाश बिलोनिया (निवासी मानसरोवर, जयपुर)

आकाश बिलोनिया पर 5000 रुपये का इनाम भी घोषित था, जिसे गिरफ्तार कर लिया गया है।

संगठित अपराध की परतें खुलीं

एडिशनल डीसीपी ईस्ट आलोक सिंघल के सुपरविजन में गठित टीम और थाना अधिकारी मोहन सिंह के नेतृत्व में की गई इस कार्रवाई में यह साफ हुआ कि बैंक के भीतर ही बैठे अधिकारियों ने बाहरी गिरोह के साथ मिलकर पूरे लोन सिस्टम को फर्जी दस्तावेजों के जरिए प्रभावित किया।

फिलहाल दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ जारी है और पुलिस इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में लगी है।

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