लखनऊ में दर्दनाक हादसा, रेलवे कॉलोनी में मकान की गिरी छत, एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत | एक सदस्य को रेलवे में मिलने वाली थी अनुकंपा नियुक्ति, पर अफसर कह रहे यह बात

लखनऊ 

इस समय उत्तरप्रदेश के लखनऊ से एक दर्दनाक हादसे की खबर आ आ रही है। शनिवार तड़के करीब चार बजे लखनऊ के आलमबाग में रेलवे कॉलोनी स्थित एक मकान की छत गिरने से उसके नीचे दबकर एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत हो गई। परिवार रेलवे की एक मृतक कर्मचारी का है जिसके आश्रित को अनुकम्पा नियुक्ति मिलने वाली थी। उसकी भी इस हादसे में मौत हो गई है। मृतकों में पति-पत्नी और 3 बच्चे हैं।  हादसे के बाद मौके पर पुलिस ने पहुंचकर राहत-बचाव कार्य शुरू किया है। शवों को बाहर निकाला गया है।

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हादसे का पता उस वक्त चला, जब सुबह मृतक के बेटे को उसका दोस्त बुलाने पहुंचा। उसने घर दरवाजा खटखटाया। मगर, कोई रिस्पॉन्स नहीं आया तो उसने खिड़की से झांक कर देखा, तो मकान की छत गिरी हुई थी। इसके बाद उसने तुरंत इस बारे में मोहल्ले के लोगों को बताया। फिर पुलिस को सूचना दी गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। हादसे पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने दुख जताया है। उन्होंने अधिकारियों से तत्काल पीड़ितों को राहत उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों से राहत कार्य में तेजी लाने को कहा गया है।

पुलिस के अनुसार खाना खाने के बाद परिवार घर में सो रहा था। रात में करीब 4 बजे हादसा हो गया। मगर, घटना के बारे में लोगों को सुबह 6-7 बजे के करीब चला। मृतकों की शिनाख्त सतीश चंद्र (40), सलोनी देवी (35), हर्षित (13), हर्षिता (10) और अंश (5) के रूप में हुई है।

रेलवे नहीं मान रहा मृतक को अपना कर्मचारी
आलमबाग स्थित रेलवे कॉलोनी में मृतक सतीश चंद्र अपने परिवार के साथ रहते थे। परिवार में उनकी पत्नी एक बेटी और दो बेटे थे। उनकी मां राम दुलारी रेलवे में कर्मचारी थी, जिनकी कुछ दिन पहले मौत हो गई थी। सतीश चंद्र को मृतक आश्रित कोटे से नौकरी मिलने वाली थी। अभी तक वह प्राइवेट नौकरी करते थे। मृतक के सभी तीनों बच्चे रेलवे के स्कूल में पढ़ते थे।

उत्तर रेलवे की वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक रेखा शर्मा ने बताया कि रेलवे कॉलोनी में स्थित यह आवास खाली करने के निर्देश दिए गए थे। आवास को तोड़ा जाना था। हादसे में पांच लोगों की मौत हुई है। मृतक में से कोई भी रेलवे का कर्मचारी नहीं था। घटना की जांच की जा रही है। अब सबसे बड़ी बात यह है कि रेलवे मृतक को अपना कर्मचारी नहीं मान रहा है। जबकि मृतक आश्रित पर उनको नौकरी मिलने वाली थी।

रेलवे कॉलोनी में जर्जर, नोटिस के बाद भी लोग रह रहे
दरअसल, रेलवे कॉलोनी में जर्जर आवासों को खाली करने का आदेश पहले ही जारी हो चुका है। इसके बाद भी लोग वहां रह रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इन मौत को दस्तक देने वाले आवासों को खाली कराने की जिम्मेदारी किसकी है? इन पांचों मौत का जिम्मेदार कौन होगा? इस बीच  मृतक के परिजनों ने बताया कि रेलवे की तरफ से बार-बार खाली करने के लिए कहा जाता था। अगर समय रहते मकान खाली कर दिए होते तो शायद ये हादसा न होता। ​​​​​​मृतक सलोनी की मां ने कहा, रविवार को बारिश हो रही थी। उस समय बच्चे घर आ गए थे। अभी तो ये लोग पहुंचे थे। नहीं पता था कि हादसा हो जाएगा।

डीएम बोले- कॉलोनी में 64 मकान थे, सभी को नोटिस जारी किया गया था
डीएम सूर्यपाल गंगवार ने कहा, यहां पर 64 मकान थे। सभी को पहले नोटिस जारी किया गया था। रेलवे के अधिकारियों से बात हुई है। जल्द ही बाकी मकान को खाली करवाया जाएगा। मामले की जांच और घटना के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के सवाल पर डीएम ने कहा कि यह रेलवे का अंदरुनी मामला है। वह लोग इसकी जांच करेंगे और जांच के आधार पर ही कार्रवाई करेंगे।

हादसे के बाद लोग कर रहे कॉलोनी खाली
कॉलोनी में हादसे के बाद कुछ लोग ई रिक्शा पर सामान बांधकर कॉलोनी खाली कर रहे हैं। हादसे के बाद रेलवे प्रशासन की तरफ से एक बार फिर से सभी कॉलोनी वासियों को घर खाली करने का मौखिक आदेश दिया गया है। रेलवे विभाग के सूत्र बताते हैं कि पूरी जर्जर कॉलोनी को खाली करने का नोटिस 6 महीने पहले आखिरी बार नोटिस दिया गया था। रेलवे के अधिकारियों के आदेश में कहा गया था कि पूरी कॉलोनी को खाली कराया जाए। कॉलोनी बनने का ठेका ठेकेदार को दिया गया है। ठेकेदार ने कॉलोनी में रहने वाले लोगों से कहा कि अगले तीन से चार महीने में कॉलोनी को तोड़कर फिर से बनाएंगे। तब तक लोग अपनी कॉलोनी खाली कर दें।

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