कैग (CAG) ने राज्य सरकार से ओल्ड पेंशन स्कीम के 10 साल के आर्थिक बोझ, ऑफ बजट कर्ज और वित्तीय स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। 15 जून डेडलाइन तय।
जयपुर
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने राज्य सरकार की वित्तीय स्थिति पर बड़ा शिकंजा कसते हुए ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) से अगले 10 साल में पड़ने वाले आर्थिक बोझ का पूरा ब्योरा मांगा है।
कैग ने स्पष्ट रूप से कहा है कि OPS लागू होने के बाद सरकार के खजाने पर कितना अतिरिक्त भार पड़ेगा, इसका दीर्घकालिक आकलन प्रस्तुत किया जाए। साथ ही राज्य के मौजूदा आर्थिक हालात और बजट की विस्तृत रिपोर्ट भी तलब की गई है।
ऑफ बजट कर्ज पर भी सवाल
कैग ने सरकार से ‘ऑफ बजट बोरोइंग’ यानी ऐसे कर्ज का अलग से विवरण मांगा है, जो सीधे बजट में नहीं दिखता लेकिन विभिन्न संस्थाओं, सरकारी उपक्रमों, बोर्डों और स्थानीय निकायों के जरिए लिया जाता है। इससे राजकोषीय घाटा और सरकारी कर्ज का वास्तविक स्वरूप छिपा रह जाता है।
साल 2025-26 के लिए ऐसे सभी उधारों का पूरा रिकॉर्ड मांगा गया है, जिसमें ग्रांट आधारित लोन, ब्याज भुगतान के लिए लिया गया कर्ज और सार्वजनिक संस्थाओं का उधार शामिल है।
15 जून तक डेडलाइन, पिछली देरी पर सख्त नाराजगी
कैग ने वित्त विभाग को साफ निर्देश दिए हैं कि सभी रिपोर्ट और आंकड़े 15 जून तक हर हाल में जमा किए जाएं। साथ ही यह भी कहा गया है कि पिछले साल आंकड़े अधूरे और देर से भेजे गए थे, जिसे इस बार किसी भी स्थिति में दोहराया न जाए।
योजनाओं, सब्सिडी और बैंक खातों तक की जांच
कैग ने केवल कर्ज ही नहीं बल्कि कई अन्य वित्तीय पहलुओं पर भी विस्तृत जानकारी मांगी है, जिनमें शामिल हैं—
- सरकारी योजनाओं में डायरेक्ट कैश ट्रांसफर का पूरा ब्योरा
- बिजली और अन्य सब्सिडी का योजनावार खर्च
- किसान सम्मान निधि सहित विभिन्न योजनाओं में कैश ट्रांसफर
- बिना खर्च बचा हुआ सरकारी फंड
विभागीय स्टॉक का वेरिफिकेशन - अधूरी योजनाओं की सूची
- सरकारी जमीनों की बिक्री और लीज डिटेल
- संपत्तियों की जियो टैगिंग स्थिति
FRBM एक्ट और वित्तीय पारदर्शिता पर जोर
कैग ने यह पूरा डेटा FRBM एक्ट के प्रावधानों और 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर मांगा है। आयोग ने पहले ही वित्तीय दस्तावेजों को अधिक पारदर्शी बनाने, सब्सिडी और ऑफ बजट कर्ज को अलग से दिखाने की बात कही थी।
आगे क्या होगा?
सभी रिपोर्ट मिलने के बाद कैग विस्तृत ऑडिट करेगा और किसी भी अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी पर ऑडिट पैरा तैयार करेगा। यह रिपोर्ट आगे विधानसभा में पेश होगी, जहां लोक लेखा समिति (PAC) इसकी गहन जांच करेगी और कार्रवाई की सिफारिशें देगी।
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