कोटा के राजकीय कला कन्या महाविद्यालय में शोध एवं विकास प्रकोष्ठ के तहत दो शोधार्थियों ने इतिहास और हिंदी विषयों पर अपने शोध कार्य का प्री-सबमिशन प्रस्तुतीकरण दिया।
कोटा
Rajkiya Kala Kanya Mahavidyalaya Kota के शोध एवं विकास प्रकोष्ठ के तत्वावधान में आयोजित प्री-सबमिशन शोध प्रस्तुतीकरण में दो शोधार्थियों ने अपने वर्षों के अध्ययन को विद्वानों के सामने रखा और सवाल-जवाब के बीच अपने निष्कर्षों को परखा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्य Dr. Seema Chauhan ने की, जबकि संयोजन शोध एवं विकास प्रकोष्ठ के प्रभारी Prof. Tribhu Nath Dubey के निर्देशन में हुआ। सह-अध्यक्षता इतिहास विभागाध्यक्ष Dr. Babita Singhal और हिंदी विभाग के Dr. Manish Sharma ने की।
हाड़ौती के मंदिरों पर शोध
पहले प्रस्तुतीकरण में इतिहास के शोधार्थी लोकेश गुंजल ने अपने शोध विषय “हाड़ोती के प्रमुख मंदिरों का ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक अध्ययन (तीसरी शताब्दी ई. से सोलहवीं शताब्दी ई. तक)” पर विस्तृत प्रस्तुति दी।
ऑनलाइन माध्यम से जुड़े उनके शोध पर्यवेक्षक Prof. Shiv Kumar Mishra ने विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। इसके बाद लोकेश गुंजल ने शोध की पृष्ठभूमि, अध्याय योजना और अध्ययन के प्रमुख निष्कर्षों से विद्वानों को अवगत कराया। प्रस्तुतीकरण के दौरान उपस्थित श्रोताओं के प्रश्नों का भी उन्होंने विस्तार से उत्तर दिया।
मैत्रयी पुष्पा के साहित्य में लोक चेतना
दूसरे सत्र में हिंदी विभाग के शोधार्थी विपुल कुमार जोरसिया ने “मैत्रयी पुष्पा के कथा साहित्य में लोक चेतना” विषय पर अपने शोधसार और निष्कर्षों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। इस शोध के पर्यवेक्षक Dr. Sanjay Kumar Lakki ने अपने मार्गदर्शन में हुए शोध की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
सवालों के बीच परखा गया शोध
दोनों प्रस्तुतीकरणों के बाद उपस्थित विद्वानों और शोधार्थियों ने शोध की प्रविधि, कथ्य और निष्कर्षों से जुड़े कई प्रश्न पूछे, जिनका संतोषजनक उत्तर शोधार्थियों ने दिया।
शोध कार्य पर संतोष व्यक्त करते हुए प्राचार्य डॉ. सीमा चौहान और महाविद्यालय के अन्य विद्वानों ने दोनों शोधार्थियों और उनके पर्यवेक्षकों को बधाई दी।
इस विमर्श में वरिष्ठ संकाय सदस्य प्रेरणा शर्मा, डॉ. राजेंद्र महेश्वरी, श्रीमती मीरा गुप्ता सहित लगभग 45 प्रतिभागी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मनीषा शर्मा ने किया, जबकि अंत में प्रकोष्ठ की वरिष्ठ सदस्य डॉ. सुनीता शर्मा ने आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. पारूल सिंह, डॉ. प्रियंका वर्मा और श्री संतोष कुमार मीणा ने तकनीकी एवं प्रबंधकीय सहयोग प्रदान किया। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्य डॉ. सीमा चौहान ने शोधार्थियों को स्तरीय और समाजोपयोगी शोध कार्य के लिए प्रेरित किया।
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