यूजीसी (UGC) ने देश के विश्वविद्यालयों (university) और कॉलेजों से अपने आसपास के 5-6 आंगनवाड़ी केंद्र अपनाने को कहा है। छात्रों की मदद से बच्चों की शुरुआती शिक्षा और गतिविधियों को बेहतर बनाने की पहल की जाएगी।
नई दिल्ली
देश के विश्वविद्यालय और कॉलेज अब सिर्फ पढ़ाई और शोध तक सीमित नहीं रहेंगे। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने उच्च शिक्षण संस्थानों को एक नई जिम्मेदारी देते हुए कहा है कि वे अपने आसपास के आंगनवाड़ी केंद्रों से जुड़कर छोटे बच्चों की शुरुआती शिक्षा को बेहतर बनाने में मदद करें।
यूजीसी ने देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से कहा है कि वे अपने परिसर के आसपास मौजूद कम से कम पांच से छह आंगनवाड़ी केंद्रों को अपनाएं और उन्हें शैक्षणिक व अन्य जरूरी सहयोग दें। इसके तहत छात्रों की मदद से बच्चों की पढ़ाई, गतिविधियों और सीखने के माहौल को बेहतर बनाने की पहल की जा सकती है।
दरअसल हाल ही में नीति आयोग की अगुवाई में आयोजित मुख्य सचिवों के सम्मेलन में देश के आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थिति पर चिंता जताई गई थी। चर्चा के दौरान यह सामने आया कि कई केंद्रों में छोटे बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित और योग्य शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं।
नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत अब तीन से छह वर्ष की उम्र के बच्चों की शुरुआती पढ़ाई भी आंगनवाड़ी केंद्रों में कराई जा रही है। लेकिन पर्याप्त प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी के कारण बच्चों को शुरुआत में ही बेहतर शिक्षा नहीं मिल पा रही है।
इसी स्थिति को सुधारने के लिए यह सुझाव सामने आया कि विश्वविद्यालय और कॉलेज अपने सामाजिक दायित्व के तहत इन केंद्रों से जुड़ें। यूजीसी ने संस्थानों से कहा है कि वे छात्रों को आंगनवाड़ी केंद्रों में इंटर्नशिप, शैक्षणिक गतिविधियों और सामुदायिक कार्यक्रमों से जोड़ें, ताकि बच्चों की शिक्षा का स्तर बेहतर हो सके।
देश में इस समय करीब 14 लाख आंगनवाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं। वहीं एक हजार से अधिक विश्वविद्यालय और लगभग 45 हजार कॉलेज हैं। यदि इन संस्थानों का सहयोग आंगनवाड़ी केंद्रों को मिलता है, तो शुरुआती शिक्षा के स्तर में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।
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