जयपुर में डॉक्टर की गिरफ्तारी से बवाल: राजस्थान में 24 घंटे निजी अस्पताल बंद | इमरजेंसी तक रोकने का फैसला

जयपुर (Jaipur) में डॉ. सोमदेव बंसल की गिरफ्तारी के विरोध में राजस्थान (Rajasthan) के निजी डॉक्टरों ने 24 घंटे की हड़ताल की घोषणा की। इमरजेंसी सेवाएं भी बंद, RGHS सेवाएं स्थगित।

जयपुर 

जयपुर में निविक अस्पताल के निदेशक डॉ. सोमदेव बंसल की गिरफ्तारी के बाद बवाल खड़ा हो गया है। इस गिरफ्तारी के विरोध में अब राजस्थान के निजी डॉक्टर सड़कों पर उतर आए हैं—और सीधे 24 घंटे की हड़ताल का ऐलान कर दिया गया है।

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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के आह्वान पर 14 अप्रैल सुबह 8 बजे से 15 अप्रैल सुबह 8 बजे तक राज्य की सभी निजी चिकित्सा सेवाएं पूरी तरह बंद रहेंगी। खास बात यह है कि इस दौरान सिर्फ ओपीडी ही नहीं, बल्कि इमरजेंसी सेवाएं तक रोकने का फैसला लिया गया है—जिससे आम लोगों की परेशानी बढ़ना तय माना जा रहा है।

‘लापरवाही नहीं मिली… फिर गिरफ्तारी क्यों?’

आईएमए के जोनल सचिव डॉ. अनुराग शर्मा का कहना है कि मेडिकल बोर्ड की जांच में किसी भी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही सामने नहीं आई, इसके बावजूद आरजीएचएस से जुड़ी कथित अनियमितताओं के आधार पर गिरफ्तारी की गई। यही वजह है कि डॉक्टरों में गहरा आक्रोश है। हालांकि सरकारी डॉक्टर इस हड़ताल में शामिल नहीं होंगे, लेकिन वे विरोध प्रदर्शन कर समर्थन जरूर जताएंगे।

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आरजीएचएस सेवाएं अनिश्चितकाल के लिए बंद

आईएमए ने सिर्फ हड़ताल ही नहीं, बल्कि राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) सेवाओं को भी निजी अस्पतालों में अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने का ऐलान किया है।

आईएमए के अध्यक्ष डॉ. महेश शर्मा और सचिव डॉ. एन.के. अग्रवाल ने संयुक्त बयान में कहा कि भुगतान में देरी, पेनल्टी और जटिल प्रक्रियाओं ने हालात और बिगाड़ दिए हैं।

‘क्रिमिनल की तरह कार्रवाई’—निजी अस्पतालों में गुस्सा

प्राइवेट हॉस्पिटल्स एंड नर्सिंग होम्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. विजय कपूर ने गिरफ्तारी पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बिना सुनवाई का मौका दिए एक डॉक्टर के साथ “हार्डकोर क्रिमिनल” जैसा व्यवहार किया गया, जिससे पूरे चिकित्सा समुदाय में आक्रोश है।

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सरकार को चेतावनी—आगे और कड़े कदम संभव

संगठनों ने सरकार से डॉ. बंसल की तत्काल रिहाई, लंबित भुगतान के निस्तारण और डॉक्टरों के साथ समन्वय बनाने की मांग की है। साथ ही साफ चेतावनी दी है—अगर मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन और तेज होगा।

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