हाथोड़ी की ऐतिहासिक बावड़ी को नया जीवन | 3.30 करोड़ की लागत से जीर्णोद्धार कार्य का शिलान्यास, IIFCL देगा सहयोग

वैर क्षेत्र के हाथोड़ी गांव की ऐतिहासिक बावड़ी के जीर्णोद्धार का शिलान्यास हुआ। लगभग 3.30 करोड़ रुपये की लागत से IIFCL के सहयोग से प्राचीन जल संरचना को नया जीवन मिलेगा।

वैर (मुरारी शर्मा)

वैर तहसील क्षेत्र के ऐतिहासिक गांव हाथोड़ी स्थित प्राचीन बावड़ी के नवीनीकरण एवं जीर्णोद्धार कार्य का शिलान्यास विधिविधान एवं पूजा-अर्चना के साथ संपन्न हुआ। शिलान्यास भारत सरकार के अवसंरचना वित्त निगम (आईआईएफसीएल) के प्रबंध निदेशक पलाश श्रीवास्तव द्वारा किया गया।

इस ऐतिहासिक बावड़ी के संरक्षण एवं पुनर्जीवन का कार्य समृद्ध ग्राम्य अभियान सोसाइटी द्वारा आईआईएफसीएल के सहयोग से लगभग 3 करोड़ 30 लाख रुपये की लागत से कराया जाएगा।

शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि पलाश श्रीवास्तव ने कहा कि भारत की प्राचीन जल संरचनाएं—जैसे बावड़ियां, तालाब और कुएं—हमारी सांस्कृतिक विरासत ही नहीं, बल्कि जीवन तंत्र का अभिन्न हिस्सा रही हैं। समय के साथ इन संरचनाओं की उपेक्षा हुई, जिससे उनकी उपयोगिता कम होती चली गई। आज अनियमित वर्षा, गिरते भूजल स्तर और बढ़ते जल संकट ने इन ऐतिहासिक जल स्रोतों की अहमियत को फिर से सामने ला दिया है।

उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से केन्द्र सरकार देशभर में ऐतिहासिक बावड़ियों के संरक्षण और पुनर्जीवन की दिशा में विशेष पहल कर रही है। हाथोड़ी गांव की इस बावड़ी के जीर्णोद्धार से एक ओर ऐतिहासिक धरोहर संरक्षित होगी, वहीं ग्रामीणों, पशुपालकों और पशुधन को मीठे पानी की स्थायी सुविधा भी उपलब्ध होगी।

वैर पंचायत समिति के विकास अधिकारी सुरेश सैनी ने कहा कि जीर्णोद्धार के बाद यह बावड़ी क्षेत्र में जल संरक्षण का एक आदर्श उदाहरण बनेगी। इससे ग्रामीणों को नियमित जल आपूर्ति मिलेगी और जल संरक्षण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी की भावना भी विकसित होगी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए समृद्ध ग्राम्य अभियान के अध्यक्ष श्री सीताराम गुप्ता ने बताया कि लगभग 300 वर्ष पुरानी इस ऐतिहासिक बावड़ी के जीर्णोद्धार हेतु आईआईएफसीएल द्वारा पर्याप्त वित्तीय सहयोग प्रदान किया गया है। परियोजना के अंतर्गत बावड़ी की संरचनात्मक मरम्मत, जल स्रोतों की सफाई, दीवारों एवं सीढ़ियों का पुनर्निर्माण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जीर्णोद्धार के बाद इसे जल स्रोत के साथ-साथ भविष्य में पर्यटन स्थल के रूप में भी विकसित किया जाएगा।

कार्यक्रम के अंत में ग्राम पंचायत के प्रशासक फत्ते सिंह ने सभी अतिथियों एवं ग्रामीणों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस बावड़ी के पुनर्जीवन से ग्रामीणों को मीठे पानी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और गांव की ऐतिहासिक पहचान को नया जीवन मिलेगा। कार्यक्रम का संचालन सीडीपीओ श्री महेंद्र अवस्थी ने किया।

समारोह में आईआईएफसीएल के सीएसआर विभाग के एचओडी सुबोध शर्मा, सहायक प्रबंध निदेशक अमित कुमार, विद्युत विभाग के पूर्व अधीक्षण अभियंता हेमराज गोयल, संस्था के स्टेट हेड पुनीत गुप्ता, अनिल गर्ग, विष्णु मित्तल, पूर्व सरपंच द्वारिका प्रसाद गोयल, कृषि उपज मंडी के पूर्व चेयरमैन महेंद्र जाटव, पूर्व सरपंच कुबेर सिंह, वैर के मन्नू लाल महंत, किसान नेता इन्दल सिंह जाट सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक एवं आसपास के गांवों के ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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