जयपुर
एसआई भर्ती 2021 पेपर लीक मामले को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) ने सोमवार को बड़ा सुनाते हुए प्रशिक्षु थानेदार की पोस्टिंग और पासिंग आउट परेड पर रोक लगा दी। इस मामले में जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। इस मामले में कोर्ट ने गृह विभाग के प्रधान सचिव, राजस्थान लोक सेवा आयोग के सचिव, डीजीपी, एसओजी के एडीजी समेत अन्य को शॉर्ट नोटिस दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 22 नवंबर को होगी।
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एकलपीठ ने कैलाश चंद शर्मा और अन्य की याचिका पर यह फैसला दिया। याचिकाकर्ता की तरफ से एडवोकेट हरेंद्र नील ने पैरवी की। नील ने बताया कि हमने अपनी याचिका में भर्ती रद्द करने की मांग की थी। याचिका में कहा गया था कि इस भर्ती में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई।
आपको बता दें कि एसआई भर्ती परीक्षा पेपर लीक केस (SI Recruitment Exam Paper Leak Case) में अब तक 50 ट्रेनी एसआई गिरफ्तार किए जा चुके हैं। 20 आरोपियों की जमानत याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है। मामले में कुल 86 लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें 50 चयनित थानेदार शामिल हैं। लेकिन पेपर लीक करने वाला यूनिक भांभू और सुरेश ढाका पेपर लीक प्रकरण के बाद विदेश भाग गए। लेकिन, अभी तक उन्हें गिरफ्तार कर भारत नहीं लाया जा सका है।
एसओजी अभी सात प्रशिक्षु थानेदारों को और तलाश रही है। जबकि 859 चयनित थानेदारों में से 300 की भूमिका की जांच कर रही है। एसओजी ने मामले में 10 अक्टूबर को दो महिला सहित चार प्रशिक्षु थानेदारों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद जांच जारी है।
वांटेड यूनिक भांभू ने हसनपुरा स्कूल से एसआइ भर्ती परीक्षा का पेपर परीक्षा से पहले लेकर कई लोगों को भेजा। भांभू ने आरोपी सुरेश ढाका को भी पेपर भेजा। सुरेश ढाका ने मोटी रकम लेकर पेपर परीक्षार्थियों तक पहुंचाया। लेकिन दोनों वांटेड की गिरफ्तारी के बाद ही परीक्षा पास करने वाले प्रशिक्षु थानेदारों की दूसरी व तीसरी कड़ी का खुलासा हो सकेगा। वहीं, एसओजी ने हरियाणा की गैंग द्वारा भी पेपर परीक्षार्थियों तक पहुंचाने का दावा किया था। हरियाणा की गैंग ने किस-किस को पेपर दिया। इसका खुलासा भी गैंग के सदस्यों के पकड़े जाने के बाद होगा।
एसओजी ने एसआई भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में 20 आरोपियों के खिलाफ 29 अक्टूबर को चार्जशीट पेश की थी। चार्जशीट में एसओजी ने बड़े खुलासे किए। एसओजी की चार्जशीट के मुताबिक इस पूरे मामले में राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के तत्कालीन चेयरमैन संजय क्षोत्रिय से लेकर सदस्य मंजू शर्मा, संगीता आर्या, जसवंत राठी सबकी भूमिका संदेहास्पद है. इन सभी ने रामू राम राईका के बेटे, बेटियों को फायदा पहुंचाया है।
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