जोधपुर महाकुंभ में 25 देशों से 50 हजार माहेश्वरी, अमित शाह बोले—राष्ट्र निर्माण में समाज की भूमिका अतुलनीय

जोधपुर में अंतर्राष्ट्रीय माहेश्वरी महाकुंभ 2026 का भव्य आयोजन, अमित शाह, ओम बिरला और राज्यपाल की मौजूदगी, 25 देशों से 50 हजार समाजजन, नवाचार और अनुशासन की मिसाल।

जोधपुर 

सूर्यनगरी जोधपुर में 09-10-11 जनवरी 2026 को आयोजित अंतर्राष्ट्रीय माहेश्वरी महाकुंभ 2026 ने समाजिक एकता, राष्ट्र निर्माण और नवाचार की ऐसी मिसाल पेश की, जिसने देश-दुनिया का ध्यान खींचा। महाकुंभ का उद्घाटन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया, जबकि समापन महामहिम राज्यपाल राजस्थान हरिभाऊ बागडे के कर-कमलों से हुआ।

कार्यक्रम में भरतपुर समाज के जिलाध्यक्ष ओ.पी. माहेश्वरी, महामंत्री मुकेश कुमार माहेश्वरी, प्रहलाद माहेश्वरी (व्यवस्थापक, होम्योपैथी चिकित्सालय) तथा अखिल भारतीय माहेश्वरी महासभा के कार्यकारी सदस्य आर.सी. गुप्ता (खटोड़) शामिल हुए।

ओ.पी. माहेश्वरी ने बताया कि इस ऐतिहासिक आयोजन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह, पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, मुख्यमंत्री राजस्थान  भजन लाल शर्मा, विधायक राजसमंद सुश्री दीप्ति किरण माहेश्वरी, पद्मविभूषण श्रीमती राजश्री बिरला, सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश जे.के. माहेश्वरी, विधि आयोग अध्यक्ष दीपक माहेश्वरी, सेवानिवृत्त मुख्य सचिव हिमाचल प्रदेश श्रीकांत वाल्दी सहित 25 देशों और 430 जिलों से लगभग 50,000 समाजजन उपस्थित रहे।

इस अवसर पर गृहमंत्रीअमित शाह ने माहेश्वरी समाज की राष्ट्र निर्माण में भूमिका की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए राम जन्मभूमि आंदोलन में बलिदान देने वाले कोठारी बंधुओं का भावपूर्ण स्मरण किया। उन्होंने कहा कि आज़ादी से पहले और बाद—हर दौर में समाज ने देश के आर्थिक व सामाजिक सुदृढ़ीकरण में उल्लेखनीय योगदान दिया।
“जहाँ नहीं पहुँची रेलगाड़ी, वहाँ पहुँचे मारवाड़ी”—यह कहावत माहेश्वरी समाज पर पूरी तरह चरितार्थ होती है।

राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने अपने संबोधन में कहा कि संख्या में कम होने के बावजूद देश की GDP में माहेश्वरी समाज का योगदान लगभग 10% है, जो इसकी कर्मठता और उद्यमशीलता का प्रमाण है।
पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रेषित संदेश का वाचन कर समाज को शुभकामनाएँ दीं।

महाकुंभ में AI, ऑटोमोबाइल, रोबोटिक्स और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों पर आधारित 12 डोमो में लगभग 750 नवाचार स्टॉल लगाए गए। आयोजन की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि रही—“उतना ही लो थाली में, व्यर्थ न जाए नाली में” के सिद्धांत का पूर्ण पालन। 50,000 लोगों के तीन दिवसीय भोजन में 3 किलो भी जूठन एकत्रित नहीं हुई, जिसने अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी की नई मिसाल कायम की।

कार्यक्रम में गृहमंत्री द्वारा समाज के गौरव ग्रंथ का विमोचन किया गया तथा विशेष डाक टिकट भी जारी हुआ। रतन लाल डागा द्वारा खेती पर लिखी गई पुस्तक का विमोचन भी किया गया। पूर्व अधिवेशन 2019 में लिए गए “अपना घर” संकल्प को आगे बढ़ाते हुए इस महाकुंभ में ओम जी सोनी द्वारा अपना घर की शुरुआत की गई।

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