कैसे लिख दूं धूप फागुनी, आज रंगीली है

कैसे लिख दूं धूप फागुनी, आज रंगीली है।
हरिया के छप्पर से महंगी, माचिस तीली है।।

एक स्वर अनंत में विलीन हो गया…

एक स्वर अनंत में विलीन हो गया।
गायकी का ताज मानो आज खो गया।।

फिर बसंत आया

फिर से महक उठी है बगिया,
खुशियों का हो ज्यों पगफेरा,
नई महक है, रूप नया सा,
नव श्रृंगारित हरित धरा का।

भरतपुर की श्री हिंदी साहित्य समिति को बचाने की मुहिम

श्री हिंदी साहित्य समिति बचाओ मंच के तत्वावधान में इस संस्था को नीलाम होने से बचने की मुहिम चलाई जा रही है। इसे अभियान के तहत मंच की और से अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को

अब सुलग रहा मधुमास है…

ईंट पत्थरों की युति पर, अब सुलग रहा मधुमास है। नग्न चिंतनों में लिपटी हर, देह मिली संत्रास है।।

पी चुके हैं हम विष का प्याला

बस बहुत हुआ अब और नहीं,
तुझमें मेरा अब ठौर नहीं,
बहुत अलग है दुनिया मेरी,
इस दुनिया में तेरा गौर नहीं।

आओ भारत नया बनाएं

नई लीक पर
नई सीख पर
नए सृजन की
राह सजाएं।

यहां जन्मे संत और सेनानी

वीर प्रसूता, पुण्य धरा ये,
यहां जन्मे संत और सेनानी,
शौर्य की गाथाएं गाती,

यहां जन्मे संत और सेनानी

वीर प्रसूता, पुण्य धरा ये,
यहां जन्मे संत और सेनानी,
शौर्य की गाथाएं गाती,

तिरंगा

ये तिरंगा हमारा ये अभिमान है। ये झंडा नहीं हिंदुस्तान है।। कृष्ण का ये सुदर्शन, धनुष राम का