सब कुछ अनुकूल नहीं होता…

जीवन में दुःख सुख आते हैं , कुछ अनुभव देकर जाते हैं…

बिटिया की पाती पापा के नाम…

पापा,
आपने कहा था -तुम बड़ी हो गई…

जीतेंगे यह जंग दुबारा…

कोरोना के घातक तीर चल रहे
घर-घर में ये पीर भर रहे…

आखिर वो मां होती है…

जब हम गर्भ में आते हैं,तब से कष्ट सह रही होती है…

प्रथम गुरू यूँ ही नहीं कहलाती…

माँ तो आखिर माँ है होती…

तू ही तो है इस सृष्टि की आदि शक्ति…

माँ है एक दिव्य शक्ति अनादि…

तबाही का मंजर…

हर जगह चीखे हैं…

जब कोई अपना जाता है…

जब कोई अपना जाता है…

हे! सृष्टि के परमेश्वर, अब लेते क्यों अवतार नहीं?

दम तोड़ती निर्बल सांसें…

तो बुरा समय क्यों ठहरेगा…

तो बुरा समय क्यों ठहरेगा…