भरतपुर की श्री हिंदी साहित्य समिति को बचाने की मुहिम

श्री हिंदी साहित्य समिति बचाओ मंच के तत्वावधान में इस संस्था को नीलाम होने से बचने की मुहिम चलाई जा रही है। इसे अभियान के तहत मंच की और से अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को

अब सुलग रहा मधुमास है…

ईंट पत्थरों की युति पर, अब सुलग रहा मधुमास है। नग्न चिंतनों में लिपटी हर, देह मिली संत्रास है।।

पी चुके हैं हम विष का प्याला

बस बहुत हुआ अब और नहीं,
तुझमें मेरा अब ठौर नहीं,
बहुत अलग है दुनिया मेरी,
इस दुनिया में तेरा गौर नहीं।

आओ भारत नया बनाएं

नई लीक पर
नई सीख पर
नए सृजन की
राह सजाएं।

यहां जन्मे संत और सेनानी

वीर प्रसूता, पुण्य धरा ये,
यहां जन्मे संत और सेनानी,
शौर्य की गाथाएं गाती,

यहां जन्मे संत और सेनानी

वीर प्रसूता, पुण्य धरा ये,
यहां जन्मे संत और सेनानी,
शौर्य की गाथाएं गाती,

तिरंगा

ये तिरंगा हमारा ये अभिमान है। ये झंडा नहीं हिंदुस्तान है।। कृष्ण का ये सुदर्शन, धनुष राम का

गणतन्त्र है…

लोकतन्त्र यह स्वतन्त्र है, इंकलाब मूलमन्त्र है।
माटी के हर कण-कण तक,

हिंदी साहित्य समिति को बचाने की मांग को लेकर कलक्टर को दिया ज्ञापन

हिंदी साहित्य समिति बचाओ मंच की ओर से नवनियुक्त जिला कलेक्टर का अभिनन्दन करते हुए हिंदी साहित्य समिति को बचाने के लिए ज्ञापन दिया गया। उनसे

घमंड

आज दिनभर से ही बहुत थकी हुई थी वो, सुबह से काम अधिक था। आज घर में ससुर जी का श्राद्ध था, ब्राह्मण भोज आयोजित था। कुछ ख़ास रिश्तेदार भी आमंत्रित थे। किन्तु सारा भोजन चूंकि ब्राह्मण आकर