‘राग कसूमल’ केवल एक ऐतिहासिक उपन्यास नहीं, बल्कि प्रेम, भक्ति, संगीत, चित्रकला और राजस्थानी सांस्कृतिक विरासत का काव्यात्मक दस्तावेज़ है। प्रो. आदित्य कुमार गुप्ता की समीक्षा इस कृति के सौन्दर्य, कथानक और भाषागत विशेषताओं को विस्तार से रेखांकित करती है।
Category: साहित्य
पोस्टर रिलीज के साथ साहित्यिक हलचल तेज | 2 अगस्त को होगा राष्ट्रीय स्तर का बड़ा आयोजन, 50 नगद पुरस्कारों की घोषणा
जयपुर क्लब में अभाकाम संस्था राजस्थान द्वारा 5वीं मुंशी प्रेमचंद साहित्य रत्न प्रतियोगिता 2026 का पोस्टर विमोचन किया गया। 2 अगस्त को होने वाले इस राष्ट्रीय आयोजन में 50 नगद पुरस्कार दिए जाएंगे।
सुनो ना, मुझे कुछ कहना है…
‘सुनो ना, मुझे कुछ कहना है…’ प्यार, एहसास और साथ निभाने की खूबसूरत भावनाओं से सजी दिल को छू लेने वाली हिंदी प्रेम कविता।
नई परिभाषा …
एक मार्मिक लघु कथा जिसमें मजदूर दिवस की असल सच्चाई सामने आती है। पेंटर के शब्दों में जानिए क्यों मजदूर के लिए छुट्टी नहीं, बल्कि पूरी मजदूरी ही सबसे बड़ा…
चार मुक्तकों में जिंदगी का आईना
चार प्रेरणादायक मुक्तक जो जिंदगी के संघर्ष, सच्चाई और हौसले को बेहद सरल और गहरे शब्दों में बयां करते हैं। पढ़ें दिल को छू लेने वाली हिंदी कविता।
मंदिर में छोटी सी प्रार्थना, और भर आई दादाजी की आंखें | पांच साल की अनाया बोली – ‘भगवान जी, पापा को अब घर भेज दो’
पांच साल की अनाया मंदिर में भगवान से ऐसी प्रार्थना करती है जिसे सुनकर दादाजी की आंखें भर आती हैं। मासूम बच्ची का अपने पिता के लिए प्यार और इंतजार दिल को छू लेने वाली कहानी बन जाता है।
ये दुनिया मतलबी है दोस्तो …
रिश्तों की बदलती मिठास, अकेलेपन की पीड़ा और दुनिया की मतलबी सच्चाई को बयान करती एक भावुक कविता। जीवन के अनुभवों और टूटते रिश्तों पर आधारित मार्मिक अभिव्यक्ति।
चेहरे …
यह लघु कहानी बताती है कि कैसे लोग प्रदूषण और ट्रैफिक पर चिंता जताते हैं, लेकिन अपने व्यवहार से उन्हीं समस्याओं को बढ़ावा भी देते हैं। समाज के दोहरे चेहरों पर तीखा व्यंग्य।
डरी हुई नन्ही…
एक मासूम बच्ची, आया की डरावनी कहानियों से इतना सहम गई कि अंधेरे में उसे चुड़ैल दिखाई देने लगी। पढ़ें “डरी हुई नन्ही” — बचपन के डर और माता-पिता के स्नेह को दर्शाती एक भावनात्मक लघु कथा।
