राजस्थान (Rajasthan) में बजरी माफिया से मिलीभगत पर PHQ का बड़ा डिकॉय ऑपरेशन। 11 थानों की पोल खुली, 5 SHO सस्पेंड और 6 लाइन हाजिर किए गए।
जयपुर। जिस पुलिस पर बजरी माफिया को रोकने की जिम्मेदारी थी, वही थाने बिके हुए मिले। शिकायतें थीं, चर्चाएं थीं—लेकिन इस बार पुलिस मुख्यालय ने कागज़ नहीं, जाल बिछाया। और उसी जाल में फंस गईं 11 थानों की हकीकत। बजरी के अवैध खनन, भंडारण और परिवहन में आंख मूंदे बैठी थाना पुलिस को PHQ ने डिकॉय ऑपरेशन में रंगे हाथ पकड़ लिया। नतीजा—पांच थानाधिकारी सस्पेंड, छह लाइन हाजिर और पूरे सिस्टम में हड़कंप।
बजरी माफिया से मिलीभगत और पुलिस की लापरवाही की लगातार मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस मुख्यालय ने एडीजी (विजिलेंस) एस. सेंगाथिर की सीधी मॉनिटरिंग में प्रदेशभर में बड़ा डिकॉय ऑपरेशन अंजाम दिया। इसके लिए 11 वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में 11 विशेष टीमें गठित की गईं, जिन्होंने 18 और 19 दिसंबर को अलग-अलग जिलों में जमीनी हालात की पड़ताल की।
डिकॉय ऑपरेशन के दौरान सामने आया कि कई थानों में बजरी के अवैध खनन, परिवहन और भंडारण पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही थी। कहीं जानबूझकर आंखें मूंदी गईं, तो कहीं जिम्मेदारी निभाने में खुली लापरवाही बरती गई। इसी आधार पर पुलिस मुख्यालय ने तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए जयपुर (दक्षिण) के शिवदासपुरा, टोंक के पीपलू और बरौनी, अजमेर के पीसांगन तथा धौलपुर के कोतवाली थानाधिकारी को निलंबित कर दिया।
इसके अलावा भीलवाड़ा के गुलाबपुरा, कोटा शहर के कुन्हाड़ी और नांता, दौसा के लालसोट, चित्तौड़गढ़ के गंगरार तथा जोधपुर के लूणी थानाधिकारी को लाइन हाजिर कर दिया गया। इन सभी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने साफ शब्दों में कहा कि बजरी के अवैध खनन, परिवहन और भंडारण में पुलिसकर्मियों की किसी भी तरह की लापरवाही या मिलीभगत को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने संकेत दिए कि जरूरत पड़ी तो आगे भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।
डीजीपी ने यह भी बताया कि इससे पहले नवंबर माह में भी प्रदेश के विभिन्न थानों में जीरो एफआईआर, ई-एफआईआर, पीड़ितों की सुनवाई, स्वागत कक्षों की कार्यप्रणाली, साइबर अपराध की शिकायतें, नाकाबंदी, यातायात व्यवस्था और महिला डेस्क पर पुलिस व्यवहार को लेकर डिकॉय ऑपरेशन किया गया था। उस दौरान भी कई जगह गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई थीं, जिस पर 11 थानों के 15 पुलिसकर्मियों को चार्जशीट देने की तैयारी की जा रही है।
स्पष्ट है कि अब PHQ सिर्फ माफिया पर नहीं, बल्कि सिस्टम के भीतर की ढिलाई और सौदेबाजी पर भी सीधी चोट कर रहा है—और संदेश साफ है: या तो कानून लागू होगा, या कार्रवाई तय है।
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