पटना (Patna) के मौलाना मजहरूल हक विश्वविद्यालय (Maulana Mazharul Haque Arabic and Persian University) में असिस्टेंट रजिस्ट्रार रिश्वत लेते पकड़ा गया। गिरफ्तारी के बाद VC पर भी रिश्वत मांगने के आरोप लगे।
पटना
पटना के मौलाना मजहरूल हक अरबी फारसी विश्वविद्यालय में सोमवार को जो हुआ, उसने पूरे सिस्टम की परतें उधेड़ दीं। निगरानी विभाग की टीम ने जैसे ही असिस्टेंट रजिस्ट्रार सनाउल्लाह को रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोचा, मामला सिर्फ एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहा—बल्कि सीधे ‘ऊपर’ तक पहुंच गया।
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रंगे हाथ गिरफ्तारी… और फिर बड़ा खुलासा
निगरानी की कार्रवाई के दौरान पकड़े गए सनाउल्लाह ने गिरफ्तारी के तुरंत बाद ऐसा बयान दिया, जिसने पूरे मामले में नया मोड़ ला दिया। उसने दावा किया कि यह रिश्वत विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर आलमगीर की ओर से मांगी जा रही थी, और वह खुद सिर्फ मिडिएटर था।
सनाउल्लाह के मुताबिक, समस्तीपुर के एक कॉलेज से KRC (केआरसी) के नाम पर 2.5 लाख रुपये मांगे गए थे—और इस बातचीत का ऑडियो रिकॉर्ड भी मौजूद है।
शिकायत से लेकर ट्रैप तक… पूरा प्लान
इस पूरे ऑपरेशन की शुरुआत 13 मार्च को हुई शिकायत से हुई। कॉलेज कर्मचारी रामानंद महतो ने निगरानी विभाग को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया कि—
- 2 KRC के लिए कुल 5 लाख रुपये की मांग की गई
- आर्थिक तंगी के चलते वे पहले एक KRC के लिए 2.5 लाख रुपये देने पहुंचे
जैसे ही पैसा देने की प्रक्रिया शुरू हुई, निगरानी टीम ने जाल बिछाकर सनाउल्लाह को रंगे हाथ पकड़ लिया।
छापेमारी जारी… कनेक्शन खंगाले जा रहे
गिरफ्तारी के बाद मामला और गंभीर हो गया है। DSP श्याम बाबू प्रसाद के नेतृत्व में टीम लगातार छापेमारी कर रही है—दफ्तर, आवास और अन्य ठिकानों पर।
छापों के दौरान—
- रिश्वत की रकम
- महत्वपूर्ण दस्तावेज
- और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स
बरामद किए गए हैं। अब इनसे जुड़े अन्य लिंक और संभावित कनेक्शन भी खंगाले जा रहे हैं।
‘ऊपर तक कमीशन’… सनाउल्लाह का दावा
सनाउल्लाह ने साफ कहा कि इस डील में सिर्फ पैसा पहुंचाना ही उसका काम था। उसके अनुसार, पूरे खेल में कमीशन का हिस्सा भी तय था, जिसमें उसे भी कुछ प्रतिशत मिलने वाला था।
कार्रवाई में शामिल टीम
इस ऑपरेशन में निगरानी विभाग की टीम में शामिल रहे—
- DSP श्याम बाबू प्रसाद
- धावा दल प्रभारी ASI मणिकांत सिंह
- ASI रवि शंकर
- कुमार रितेश
- सिपाही वसीम अहमद
अब सबसे बड़ा सवाल यही है— क्या यह सिर्फ एक गिरफ्तारी है, या फिर जांच की आंच और ऊपर तक जाएगी?
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