तू ही तो है इस सृष्टि की आदि शक्ति…

मदर्स डे 

डॉ. विनीता राठौड़ 

माँ है एक दिव्य शक्ति अनादि
भौतिक शरीर में प्राण फूंकती
आत्मा को मन्दिर वो बनाती
नवजीवन सृजन करने हेतु
स्वीकारती स्व मृत्यु की चुनौती
जीवात्मा  के शुद्धिकरण हेतु
मंत्रों के जाप निरंतर  करती
नौ महीनों तक अपने लहू से,
सिंचित कर हमें पोषित करती
प्रथम गुरू हमारी बन कर
गर्भ में ही जगत का ज्ञान कराती

हमें सुसंस्कारित करने हेतु
जीवन  मूल्यों  का पाठ पढ़ाती
वाणी को हमारी शब्द देने हेतु
अभिनव प्रयास सतत् वो करती
नेह से अपनी अंगुली  पकड़ा कर
हमको चलना भी वही सिखाती
चैन की नींद  सुलाने हेतु
मधुर लोरियां गा कर सुनाती
आंखों की ज्योति बन कर
जीवन हमारा प्रकाशित करती
त्याग कर अपना सुख और चैन
सब सुख सुविधा हमें दिलाती

हर मुश्किल से बचाने हेतु
आशीषों का कवच पहनाती
कमजोरी पर काबू करना सिखाती
क्षमताओं से हमें अवगत कराती
मधुर स्मृतियां छोड़ सकें हम
श्रेष्ठ मनुज बनाने को प्रयासरत रहती
समय बदलता, परिस्थितियां बदलती,
किन्तु माँ की ममता नहीं बदलती,
शब्द कोष के शब्द कम हैं माँ,
तेरी महिमा का नहीं  कोई थाती
शीश नमन है तेरे चरणों में माँ
तू ही तो है इस सृष्टि की आदि शक्ति।

( लेखिका राजकीय महाविद्यालय, नाथद्वारा में प्राणीशास्त्र की सह आचार्य हैं)




 

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