कविता
डॉ. अलका अग्रवाल
तेरा परचम फिर फहरेगा
जब अच्छा समय ना रहा सदा,
तो बुरा समय क्यों ठहरेगा।
यह भी जाएगा धीरज धर,
तेरा परचम फिर फहरेगा ।
यह जीवन है, इसमें सब कुछ,
अनुकूल भी है, प्रतिकूल भी है,
है परिवर्तन ही शाश्वत सच,
तेरा परचम फिर फहरेगा।
दुख अगर कभी ना आएं तो,
सुख का महत्व क्या जानोगे।
यह घड़ी परीक्षा की है सुन,
तेरा परचम फिर फहरेगा।
जिन विपदाओं से घिरा हुआ ,
आमूल नष्ट हो जाएंगी।
सुख का सूरज चमकेगा तब ,
तेरा परचम फिर फहरेगा।
(लेखक सेवानिवृत कालेज प्राचार्य हैं)
ये भी पढ़ें
- खाली नहीं रहेगी MPUAT की एक इंच जमीन, अगले 10 साल का ‘सीड मिशन’ तैयार, कुलगुरु प्रो. प्रताप सिंह ने दिया बड़ा लक्ष्य | बीज उत्पादन बढ़ाकर आत्मनिर्भरता पर फोकस
- रैली के 7 दिन बाद भी सुनवाई नहीं, किसान फिर जुटेंगे रणभेरी बजाने | लटूरिया हनुमान मंदिर में तय होगी BDA के खिलाफ आंदोलन की अगली रणनीति
- राजस्थान की इंडस्ट्री को नई उड़ान, एक्सपोर्ट डायरेक्टरी-2026 का भव्य विमोचन, सचिवालय में दिखा बड़ा औद्योगिक संदेश | मुख्य सचिव ने बताया ‘राज्य की वैश्विक पहचान का दस्तावेज’
- CBSE में भूचाल, चेयरमैन-सेक्रेटरी हटाए गए, OSM सिस्टम पर बवाल के बीच साइबर अटैक से हिला पोर्टल | संसद की स्थायी समिति में बोर्ड की जमकर क्लास
- भरतपुर में माहेश्वरी महिला संगठन की नई टीम का गठन | प्रीती मोहता को मिली कमान, महिलाओं ने संभाली नेतृत्व की जिम्मेदारी
