नई दिल्ली
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल लेन-देन (Digital Transactions) को और सुरक्षित बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब 1 अप्रैल 2026 से देशभर में होने वाले हर डिजिटल पेमेंट पर कम से कम दो-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) लागू होगा। यानी किसी भी ट्रांजैक्शन के लिए अब सिर्फ OTP ही नहीं, बल्कि पासवर्ड, बायोमेट्रिक, डिवाइस-टोकन या हार्डवेयर टोकन जैसे कम से कम दो अलग-अलग सुरक्षा उपायों से वेरिफिकेशन करना होगा।
रिटायरमेंट से 7 दिन पहले खुला राज | 32 साल से फर्जी डिग्री पर पढ़ा रहा था शिक्षक
क्यों जरूरी है नया नियम?
डिजिटल पेमेंट्स में अब तक SMS आधारित OTP सबसे आम सुरक्षा तरीका रहा है। लेकिन, फिशिंग और सिम-स्वैपिंग जैसे फ्रॉड्स के चलते RBI ने अब और मजबूत सुरक्षा लेयर जोड़ने का फैसला लिया है।
कैसा होगा नया सिस्टम?
हर लेन-देन में कम से कम एक ऑथेंटिकेशन डायनेमिक होगा, यानी हर ट्रांजैक्शन के लिए अलग और यूनिक।
भुगतान सेवा प्रदाता (Payment Service Provider) की जिम्मेदारी होगी कि अगर सुरक्षा नियम टूटे तो ग्राहक को 100% मुआवजा मिले।
जोखिम-आधारित जांच (Risk-based Authentication) भी की जाएगी, जिसमें यूजर के व्यवहार, डिवाइस या लोकेशन देखकर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू होंगे।
बदलाव का असर
इस नियम से डिजिटल पेमेंट्स न केवल ज्यादा सुरक्षित बल्कि भरोसेमंद और यूज़र-फ्रेंडली भी हो जाएंगे। भारत में हर रोज़ होने वाले करोड़ों ऑनलाइन ट्रांजैक्शंस पर यह नया सिस्टम साइबर फ्रॉड के खिलाफ एक मजबूत कवच साबित होगा।
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