लेंसकार्ट (Lenskart) की 27 पन्नों की ग्रूमिंग गाइडलाइन लीक होने के बाद हिजाब, बिंदी और तिलक को लेकर विवाद छिड़ गया। कंपनी ने इसे पुरानी पॉलिसी बताते हुए सफाई दी है।
नई दिल्ली
आईवियर ब्रांड Lenskart एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। इस बार मामला किसी प्रोडक्ट या सर्विस का नहीं, बल्कि कंपनी की कथित ग्रूमिंग और यूनिफॉर्म गाइडलाइन्स का है, जिसने सोशल मीडिया पर तीखी बहस छेड़ दी है।
विवाद तब शुरू हुआ जब कंपनी की 27 पन्नों की ‘स्टाफ यूनिफॉर्म एंड ग्रूमिंग गाइड’ के कुछ हिस्से ऑनलाइन वायरल हो गए। इन स्क्रीनशॉट्स में दावा किया गया कि हिजाब की अनुमति दी गई है, लेकिन बिंदी, तिलक और कलावा जैसे धार्मिक प्रतीकों पर रोक जैसी बातें शामिल हैं। इसी को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर यूजर्स ने जमकर प्रतिक्रिया दी।
कई यूजर्स ने गाइडबुक के पेज शेयर करते हुए सवाल उठाए कि क्या यह धार्मिक पहचान के आधार पर भेदभाव है। कुछ पोस्ट्स में इसे भारत जैसे बहुसांस्कृतिक देश में असंतुलित नीति बताया गया, तो कुछ ने कंपनी पर हिंदू प्रतीकों को लेकर दोहरे मानदंड अपनाने के आरोप लगाए।
विवाद बढ़ने के बाद Peyush Bansal ने सामने आकर सफाई दी। उन्होंने कहा कि वायरल हो रहा दस्तावेज पुराना है और वर्तमान HR नीतियों को सही तरीके से नहीं दर्शाता। उनके अनुसार, कंपनी में धार्मिक अभिव्यक्ति पर कोई रोक नहीं है और बिंदी-तिलक जैसी चीजों को लेकर कोई प्रतिबंध लागू नहीं है।
बंसल ने यह भी कहा कि कंपनी समय-समय पर अपनी ग्रूमिंग और HR गाइडलाइन्स को अपडेट करती है, और जो डॉक्यूमेंट वायरल हुआ है वह अब की पॉलिसी को रिप्रेजेंट नहीं करता।
Hi, all. I’ve been seeing an inaccurate policy document going viral about Lenskart.
I want to speak directly that this document does not reflect our present guidelines.
Our policy has no restrictions on any form of religious expression, including bindi and tilak, and we…— Peyush Bansal (@peyushbansal) April 15, 2026
लेंसकार्ट के दस्तावेज में लिखा है, “सिंदूर लगाते समय उसे कम से कम लगाना चाहिए और वह माथे पर नहीं गिरना चाहिए। बिंदी लगाने की अनुमति नहीं है।”
दस्तावेज में आगे लिखा है कि हिजाब की अनुमति तो है, लेकिन साथ ही मुस्लिम महिलाओं के लिए सिर पर पहनने वाले स्कार्फ के बारे में भी बताया गया है। लीक दस्तावेज में लिखा है, “बिंदी/क्लचर की अनुमति नहीं है।” इसमें यह भी कहा गया है कि धार्मिक धागे या कलाई में पहने जाने वाले कलावा को हटा देना चाहिए। लेखिका और कार्यकर्ता शेफाली वैद्य ने लेंसकार्ट के फाउंडर को टैग करते हुए X पर लिखा, “हाय पीयूष बंसल, क्या आप कृपया स्पष्ट कर सकते हैं कि लेंसकार्ट पर हिजाब की अनुमति है लेकिन बिंदी/कलावा की नहीं?”
हालांकि, इस स्पष्टीकरण के बावजूद बहस थमी नहीं है। कुछ यूजर्स का दावा है कि यह गाइडबुक हाल ही की है, जबकि अन्य इसे पुरानी पॉलिसी मानकर कंपनी के बचाव से असहमत दिखे। सोशल मीडिया पर यह मुद्दा अब “कॉरपोरेट पॉलिसी बनाम धार्मिक पहचान” की बहस में बदलता नजर आ रहा है।
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आपको बता दें कि आईवियर (चश्मा) इंडस्ट्री की एक बड़ी कंपनी है, जो किफायती दामों पर चश्मे उपलब्ध कराती है। यह अपने फ्रेम और लेंस खुद बनाती है और बीच के बिचौलियों को हटाकर लागत कम करती है। यह स्टार्टअप 2019 में यूनिकॉर्न बना था और इसे “सूनिकॉर्न” भी कहा जाता है। खबरों के मुताबिक, कंपनी लगभग 5.6 अरब डॉलर के अनुमानित वैल्यूएशन के साथ IPO की तैयारी कर रही है।
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