Himachal News: अब ‘पोर्टल के भीतर’ झांकेगा महालेखाकार | योजनाओं के लाभार्थियों से लेकर अफसरों की जिम्मेदारी तक सब रिकॉर्ड होगा ऑनलाइन

अब महालेखाकार कार्यालय हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के सरकारी विभागों के पोर्टल में सीधे प्रवेश कर योजनाओं के लाभार्थियों और विभागीय कार्यप्रणाली की निगरानी करेगा। नई व्यवस्था से पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद।

शिमला 

सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की सूची अब सिर्फ फाइलों में बंद नहीं रहेगी। अब महालेखाकार कार्यालय सीधे सरकारी पोर्टलों के भीतर जाकर यह देख सकेगा कि योजनाओं का फायदा किसे मिला, किसे नहीं और कहीं पात्र लोगों को दरकिनार कर राजनीतिक निष्ठा के आधार पर लाभ तो नहीं बांटे जा रहे।

नई व्यवस्था के तहत Comptroller and Auditor General of India के अधीन कार्यरत Accountant General Office को हिमाचल प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों के पोर्टल और ऑनलाइन सिस्टम तक एक्सेस दिया जाएगा। इसके बाद विभागों को तीन वर्षों तक के सभी लाभार्थियों का विस्तृत रिकॉर्ड उपलब्ध कराना होगा।

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अब तक व्यवस्था यह थी कि सरकारी विभाग खुद रिकॉर्ड उपलब्ध करवाते थे और उसी आधार पर ऑडिट किया जाता था। लेकिन नई कार्यप्रणाली में महालेखाकार कार्यालय सीधे विभागों के डिजिटल सिस्टम में जाकर जानकारी देख सकेगा। इसके लिए विभागाध्यक्षों को पोर्टल के पासवर्ड या विशेष एक्सेस कोड उपलब्ध कराने होंगे।

इस बदलाव का सबसे बड़ा असर यह होगा कि योजनाओं के लाभार्थियों की पारदर्शी निगरानी संभव हो सकेगी। इससे यह भी सामने आ सकेगा कि कहीं सत्तारूढ़ व्यवस्था में दलगत निष्ठा रखने वाले लोगों को ही प्राथमिकता तो नहीं दी जा रही और पात्र लोगों को नजरअंदाज तो नहीं किया जा रहा।

नई प्रणाली के तहत महालेखाकार कार्यालय केवल सालाना ऑडिट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समय-समय पर विभागों की वेबसाइट, पोर्टल और ऑनलाइन प्रणालियों की निगरानी करता रहेगा। इससे विभागों के कामकाज पर निरंतर नजर रखी जा सकेगी।

दरअसल कुछ महीने पहले महालेखाकार कार्यालय की ओर से प्रदेश सरकार को पत्र भेजकर विभागों के डिजिटल सिस्टम तक एक्सेस देने का अनुरोध किया गया था। इसके बाद प्रदेश सरकार ने विभागों की कार्यप्रणाली देखने की अनुमति प्रदान कर दी।

अनुमति मिलने के बाद महालेखाकार कार्यालय के अधिकारियों ने सबसे पहले Himachal Pradesh Social Justice and Empowerment Department और Himachal Pradesh Horticulture Department से उनके पोर्टल और योजनाओं के लाभार्थियों का विस्तृत डेटा देखने की सुविधा मांगी। शुरुआती आनाकानी के बाद दोनों विभागों ने पोर्टल के भीतर तक एक्सेस दे दी, जिससे दस्तावेजों और लाभार्थियों के रिकॉर्ड की सीधे जांच संभव हो गई।

पहले महालेखाकार कार्यालय मुख्य रूप से सरकारी बजट खर्च का ऑडिट करता था, लेकिन अब नियमों के विरुद्ध काम करने वाले अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से भी जिम्मेदार ठहराया जा सकेगा।

दिलचस्प बात यह है कि राज्य के सभी सरकारी विभागों के लिए डिजिटल गेट-वे माने जाने वाले Himachal Pradesh State Digital Governance Department के पास भी विभागों की गतिविधियों को सीधे देखने की सुविधा नहीं है। राज्य सचिवालय में बैठे अधिकारी भी विभागों के कामकाज को सीधे ऑनलाइन नहीं देख पाते और उन्हें विभागाध्यक्षों पर ही निर्भर रहना पड़ता है।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ने और जवाबदेही तय होने की संभावना मानी जा रही है।

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