सहायक अभियोजन अधिकारी भर्ती पर सवालों की बौछार | 181 पद, 2700 परीक्षार्थी और पास सिर्फ चार | RPSC रिज़ल्ट को हाईकोर्ट में चुनौती

राजस्थान में सहायक अभियोजन अधिकारी भर्ती परीक्षा में 181 पदों के लिए सिर्फ 4 अभ्यर्थी पास हुए। RPSC के नतीजों को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।

जयपुर 

राजस्थान में सहायक अभियोजन अधिकारी (APO) भर्ती परीक्षा का नतीजा सामने आते ही ऐसा भूचाल आया कि हजारों अभ्यर्थियों की मेहनत पर सवाल खड़े हो गए। 181 पदों के लिए हुई इस परीक्षा में 2700 उम्मीदवार मुख्य परीक्षा तक पहुंचे, लेकिन परिणाम ऐसा आया कि सिर्फ 4 अभ्यर्थी ही सफल घोषित हुए। बाकी 2696 उम्मीदवार फेल—और यहीं से विवाद ने तूल पकड़ लिया।

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181 पद, दो पेपर… फिर भी चयन सिर्फ चार का

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने सहायक अभियोजन अधिकारी के 181 पदों पर भर्ती निकाली थी। भर्ती प्रक्रिया दो चरणों में हुई—

  • प्रारंभिक परीक्षा के बाद 2700 अभ्यर्थी चयनित होकर
  • 1 जून को आयोजित मुख्य परीक्षा में बैठे

मुख्य परीक्षा में दो पेपर थे—

  • पेपर-1 (विधि विषय): 300 अंक
  • पेपर-2 (हिंदी और अंग्रेजी भाषा): 100 अंक

नियम साफ थे—हर पेपर में न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक अनिवार्य। आयोग का दावा है कि अधिकांश अभ्यर्थी इस शर्त को पूरा नहीं कर सके।

10 दिसंबर को रिज़ल्ट, उसी दिन से हंगामा

10 दिसंबर 2025 को जैसे ही परिणाम जारी हुआ, अभ्यर्थियों में हड़कंप मच गया। सवाल उठने लगे—

  • क्या मूल्यांकन निष्पक्ष था?
  • क्या पेपर असामान्य रूप से कठिन था?
  • या जांच प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी हुई?

आरोप यह भी है कि RPSC ने मूल्यांकन की स्पष्ट नीति सार्वजनिक नहीं की, जिससे संदेह और गहराता चला गया।

अब मामला हाईकोर्ट में 

नतीजों से असंतुष्ट अभ्यर्थियों ने अब राजस्थान हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। यह याचिका वरिष्ठ अधिवक्ता तनवीर अहमद के माध्यम से दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि—

  • परिणाम मनमाने और अव्यावहारिक हैं
  • यह चयन प्रक्रिया संविधान के मूल अधिकारों का उल्लंघन करती है
  • इतने बड़े स्तर पर असफलता अपने-आप में संदेह पैदा करती है

अभ्यर्थियों की मांगें क्या हैं?

याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की है कि—

  • परिणाम पर तत्काल रोक लगाई जाए
  • पूरे रिज़ल्ट को रद्द किया जाए
  • मूल्यांकन प्रक्रिया को गैरकानूनी घोषित किया जाए
  • उत्तर पुस्तिकाओं का दोबारा मूल्यांकन कराया जाए
  • भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए

आयोग के सामने सबसे बड़ा सवाल

181 पदों के लिए निकली भर्ती में सिर्फ 4 का चयन—यह सिर्फ एक परीक्षा परिणाम नहीं, बल्कि पूरी चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल बन चुका है। अब निगाहें राजस्थान हाईकोर्ट पर टिकी हैं कि वह इस असाधारण नतीजे पर क्या रुख अपनाता है।

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