उदयपुर (Udaipur) के महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MPUAT) के सीटीएई में LASIRE-2026 अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कृषि नवाचार और डिजिटल तकनीकों पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।
उदयपुर
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बदलते दौर में नवाचार और शोध को नई दिशा देने के उद्देश्य से सोमवार को उदयपुर में अंतरराष्ट्रीय स्तर का बड़ा अकादमिक मंच सज गया। Maharana Pratap University of Agriculture and Technology के College of Technology and Engineering में 23 मार्च से दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी LASIRE-2026 (Leveraging Artificial Intelligence to Strengthen Innovation & Research Ecosystem) का शुभारंभ हुआ। यह संगोष्ठी हाइब्रिड मोड में आयोजित की जा रही है, जिसमें देश-विदेश के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, उद्योग विशेषज्ञों और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी रही।
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उद्घाटन सत्र में S. L. Mehta, B. P. Sharma और Sandeep Sancheti विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस दौरान वक्ताओं ने नवाचार और अनुसंधान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती भूमिका पर विचार साझा किए।
सीटीएई के डीन Sunil Joshi ने कृषि क्षेत्र में AI के उपयोग को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि डेटा आधारित फसल प्रबंधन से उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव हो रहा है। उन्होंने बताया कि सेंसर तकनीक, उपग्रह डेटा और मौसम विश्लेषण जैसी आधुनिक प्रणालियां किसानों को समय पर सटीक निर्णय लेने में मदद कर रही हैं। उनके अनुसार AI आधारित समाधान फसल निगरानी, सिंचाई प्रबंधन और रोग नियंत्रण को अधिक प्रभावी बना सकते हैं।
अपने संबोधन में S. L. Mehta ने कहा कि AI शोध के लिए एक शक्तिशाली उपकरण है, जो अनुसंधान की गति और गुणवत्ता दोनों को बढ़ाता है। उन्होंने प्रतिभागियों को नियमित अध्ययन, आलोचनात्मक सोच और नवीन शोध सामग्री पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए प्रेरित किया, ताकि AI के दुरुपयोग और गलत निष्कर्षों से बचा जा सके।
वहीं B. P. Sharma ने AI से जुड़े साइबर सुरक्षा जोखिमों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि AI आधारित सिस्टम में डेटा सुरक्षा, गोपनीयता और सिस्टम की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। उन्होंने प्रतिभागियों को सुरक्षित डिजिटल प्रथाएं अपनाने और साइबर खतरों के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी।
मुख्य वक्ता Sandeep Sancheti ने अपने संबोधन में कहा कि AI आधारित शोध में गुणवत्ता, डेटा की विश्वसनीयता और वैश्विक स्तर पर शोध की दृश्यता अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने शोधकर्ताओं से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त जर्नल्स और प्लेटफॉर्म पर उच्च गुणवत्ता वाले शोध प्रकाशित करने का आह्वान किया तथा डेटा-आधारित अनुसंधान पद्धतियों और आधुनिक डिजिटल टूल्स के उपयोग पर बल दिया।
संगोष्ठी के तकनीकी सत्रों में Varun Vij, Benjamin Holtzman, Vishal Soni और Gaurav Joshi ने AI सिस्टम की संरचना, डेटा गुणवत्ता, स्केलेबल इंफ्रास्ट्रक्चर और उद्योगों में AI के व्यावहारिक उपयोग जैसे विषयों पर अपने विचार साझा किए।
संगोष्ठी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, कृषि-नवाचार, डेटा विज्ञान और उभरती डिजिटल तकनीकों से जुड़े विषयों पर गहन चर्चा हो रही है। कार्यक्रम के दौरान युवा शोधकर्ताओं के लिए पोस्टर प्रस्तुति प्रतियोगिता भी आयोजित की जा रही है, जिससे उन्हें अपने शोध कार्य प्रस्तुत करने और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है।
आयोजन सचिव Vikramaditya Dave ने बताया कि यह संगोष्ठी अकादमिक और उद्योग जगत के बीच सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है, जो विशेष रूप से युवा शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को नवाचार के लिए प्रेरित करेगी। अंत में आयोजन समिति की ओर से सभी वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया।
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