जयपुर
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बगावत करने वाले सचिन पायलट खेमे के मंत्रियों और विधायकों को शुक्रवार को एकबार फिर सरकार गिराने की कोशिशों का उलाहना दिया। गहलोत ने उलाहना ही नहीं दिया बल्कि इस बार सचिन खेमे के विधायकों और मंत्रियों का नाम ले-लेकर कहा कि आप लोग तो हमको छोड़कर चले गए थे। ये 80 लोग साथ थे; इसलिए सरकार बच गई। गहलोत के इस बयान के बाद अब कांग्रेस में फिर खट-पट शुरू हो सकती है।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बगावत करने वाले सचिन पायलट खेमे के मंत्रियों और विधायकों को यह उलाहना आज सीएम निवास पर कांग्रेस की महंगाई के खिलाफ 12 दिसंबर को होने वाली रैली की तैयारी को लेकर अपनी मंत्रिपरिषद की अनौपचारिक बैठक में दिया। उनके इस उलाहने का जवाब सचिन खेमे के दौसा से विधायक और फिर से मंत्री बने मुरारी मीणा ने बैठक में ही बैठे-बैठे दिया और कहा कि मुख्यमंत्रीजी, अब तो यह बोलना बंद कीजिए।
आपको बता दें कि इससे पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 30 नवंबर को भी प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में रैली की तैयारी बैठक में पायलट कैंप पर हमला बोला था और कहा था कि 19 लोग छोड़कर चले गए थे तो उस वक्त सरकार संकट में आ गई थी। हमारे निर्दलीय साथियों, बसपा से कांग्रेस में आने वाले साथियों ने अगर साथ नहीं दिया होता तो सरकार नहीं बचती। इन साथियों का सरकार बचाने में दिए योगदान को मैं भूल नहीं सकता। सरकार बचाने वाले कई लोगों को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली है, लेकिन उन्हें आगे शिकायत नहीं रहेगी।’
गहलोत ने इसके बाद अब शुक्रवार को फिर सचिन खेमे को घेरा और वह भी इस बार नाम ले-लेकर। गहलोत आज जब सचिन खेमे पर हमला बोल रहे थे तो उस मीटिंग में संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और प्रभारी अजय माकन भी मौजूद थे।
गहलोत ने पायलट खेमे के विधायकों और मंत्रियों की और इंगित करते हुए कहा कि ‘आप मंत्री इसीलिए हो कि 80 लोग छोड़कर नहीं गए। तभी आज सरकार है और हम मंत्रिपरिषद की बैठक कर रहे हैं। रमेश मीणा, विश्वेंद्र सिंह, हेमाराम चौधरी तो छोड़कर चले गए थे। 80 विधायक रुके और हमें छोड़कर नहीं गए, तभी तो सरकार बची है।
गहलोत ने मुरारी मीणा की बात को किया अनसुना
मुख्यमंत्री के यह बात बोलते ही मंत्रियों की पंक्ति में बैठे पायलट कैंप के मंत्री मुरारी लाल मीणा ने बैठे-बैठे ही कहा कि मुख्यमंत्रीजी अब तो 19-19 बोलना बंद कर दीजिए। अब तो सब बदल चुका है। लेकिन गहलोत ने मुरारी मीणा की बात पर ध्यान नहीं दिया। गहलोत ने यह बात सुनकर मुरारी लाल मीणा की तरफ देखा, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं दिया और इसके बाद वह महंगाई के मुद्दे पर होने जा रही बैठक को लेकर अपनी बात रखने लगे।
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