जयपुर में ‘विशाल भारत : आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य’ विषय पर व्याख्यान हुआ। दिया कुमारी, डॉ. महेश चंद्र शर्मा और लेफ्टिनेंट जनरल पी.एस. शेखावत ने विचार रखे।
जयपुर। भारत को 2047 तक सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में देश की आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और सामरिक ताकत को कैसे आगे बढ़ाया जाए, इस पर जयपुर में गंभीर मंथन हुआ। महाराजा अग्रसेन सभागार, अग्रवाल कॉलेज में राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के जयपुर चैप्टर की ओर से ‘विशाल भारत : आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य’ विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी रहीं।
कार्यक्रम की शुरुआत मंच के जयपुर चैप्टर अध्यक्ष डॉ. एस.एस. अग्रवाल की प्रस्तावना से हुई। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की पहचान केवल उसकी भौगोलिक सीमाओं से तय नहीं होती। भूमि, संस्कृति और सुरक्षा इसके महत्वपूर्ण आधार हैं। विशाल भारत की अवधारणा को समझे बिना राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रभावी उपायों को पूरी तरह समझना मुश्किल है। इसी सोच के साथ आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक पहलुओं को केंद्र में रखकर कार्यक्रम आयोजित किया गया।
‘दुनिया जीतने नहीं, जोड़ने की बात करता है भारत’
उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2047 तक सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत बनाने के लक्ष्य में प्रत्येक नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और भारत भी बदलाव के साथ आगे बढ़ रहा है। भारत दुनिया को जीतने की नहीं, बल्कि दुनिया को जोड़ने की बात करता है। उन्होंने इसे भारत के विश्व गुरु बनने की दिशा में महत्वपूर्ण सोच बताया।
दिया कुमारी ने विद्यार्थियों से सोशल मीडिया के इस्तेमाल में जिम्मेदारी बरतने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थी ही वर्ष 2047 में देश का नेतृत्व करेंगे। भारत खेल, शिक्षा और अंतरिक्ष सहित विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने युवाओं से देश की आलोचना के बजाय उसकी प्रगति में योगदान देने की अपील की।
गंधार से बर्मा तक ‘विशाल भारत’ की अवधारणा पर चर्चा
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एकात्म मानव दर्शन अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान के अध्यक्ष डॉ. महेश चंद्र शर्मा ने विशाल भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अवधारणा पर विस्तार से बात रखी। उन्होंने अफगानिस्तान के गंधार से लेकर म्यांमार के बर्मा तक हिमालय के नीचे फैले भारत के ऐतिहासिक भूगोल का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि अफगान, बर्मा, पंजाब और सिंध आज भारत का हिस्सा क्यों नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि इसके पीछे केवल राजनीतिक सीमाओं का बदलना ही कारण नहीं रहा, बल्कि संस्कृति के कमजोर होने की प्रक्रिया को भी समझना होगा। डॉ. शर्मा ने कहा कि भारतीय संस्कृति आज भी जीवंत है और हिंदू संस्कृति को भारतीय संस्कृति से अलग करके नहीं देखा जा सकता। हिंदू को केवल एक संप्रदाय के रूप में देखने से भारतीय सांस्कृतिक अवधारणा सीमित हो जाती है।
अर्थव्यवस्था में जनकल्याण को केंद्र में रखने पर जोर
डॉ. महेश चंद्र शर्मा ने वर्तमान वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि बड़ी मात्रा में धन सुरक्षा, शेयर बाजार, रियल एस्टेट और करेंसी ट्रेडिंग जैसे क्षेत्रों में जा रहा है। उनके अनुसार अर्थव्यवस्था में उत्पादन, वितरण और उपभोग के साथ जनकल्याण की भावना भी जरूरी है।
उन्होंने परिवारों में बढ़ते स्वास्थ्य खर्च का उदाहरण देते हुए कहा कि कई परिवारों में भोजन की तुलना में दवाइयों पर अधिक खर्च हो रहा है। ऐसे में शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है।
उन्होंने भारतीय परिवार व्यवस्था में महिलाओं की भूमिका को भी रेखांकित किया। कहा कि महिलाएं परिवार संभालने, बच्चों के पालन-पोषण और घर की व्यवस्था चलाने में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। इस योगदान का मूल्यांकन केवल आर्थिक आंकड़ों के आधार पर नहीं किया जा सकता।
‘हमारी दसों भुजाएं अपनी होनी चाहिए’
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए डॉ. शर्मा ने कहा कि भारत को शस्त्र निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना होगा। उन्होंने कहा कि युद्ध अपनी ताकत के भरोसे लड़े जाते हैं और देश की सैन्य क्षमता के लिए आत्मनिर्भरता जरूरी है। उन्होंने भारत के आत्मनिर्भरता के संकल्प को महत्वपूर्ण कदम बताया।
लेफ्टिनेंट जनरल पी.एस. शेखावत ने बताईं सामरिक चुनौतियां
व्याख्यान को लेफ्टिनेंट जनरल पी.एस. शेखावत ने भी संबोधित किया। उन्होंने वैश्विक परिस्थितियों, भारत की सैन्य व्यवस्था और सामरिक चुनौतियों पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि वर्तमान विश्व में युद्ध स्थायी और शांति अस्थायी होती जा रही है। ऐसे माहौल में भारत को सामरिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनना होगा।
उन्होंने आंतरिक सुरक्षा के संदर्भ में नागरिकों की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्तव्यों के निर्वहन के लिए तैयार रहना चाहिए। राष्ट्रप्रेमी और सभ्य नागरिक ही राष्ट्र की वास्तविक शक्ति होते हैं।
‘विशाल भारत’ के संकल्प के साथ सामूहिक प्रयास का आह्वान
राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष सरदार जसवीर सिंह ने विशाल भारत के निर्माण का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मंच भारत के वैभव को विश्व पटल पर स्थापित करने के उद्देश्य से विभिन्न क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। उन्होंने आर्थिक, सामरिक और सांस्कृतिक रूप से भारत को मजबूत बनाने के लिए सामूहिक प्रयासों को जरूरी बताया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ राजस्थान क्षेत्र के क्षेत्र संचालक डॉ. रमेश चंद्र अग्रवाल ने भारत की सांस्कृतिक अवधारणा पर विचार रखते हुए कहा कि भारत की आधारभूत शक्ति उसका सनातन धर्म है। उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्म को केवल मजहब या संप्रदाय तक सीमित नहीं किया जा सकता, बल्कि यह व्यक्ति को कर्तव्य और मानवीय आचरण का मार्ग दिखाने वाली व्यवस्था है।
उन्होंने कहा कि विश्व पटल पर भारत का विशिष्ट स्थान है और 21वीं सदी को भारत की सदी बनाने की दिशा में देश आगे बढ़ रहा है। उन्होंने वसुधैव कुटुंबकम की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि कोरोना काल में भारत ने 100 देशों को वैक्सीन की आपूर्ति की। उनके अनुसार देश में राष्ट्रीय चेतना का जागरण हो रहा है और गुलामी के प्रतीकों को हटाकर भारतीय गौरव को पुनर्स्थापित करने का प्रयास जारी है।
डॉ. एस.एस. अग्रवाल ने बताया आयोजन का उद्देश्य
मंच के जयपुर चैप्टर अध्यक्ष डॉ. एस.एस. अग्रवाल ने कहा कि राष्ट्र केवल भौगोलिक सीमाओं से नहीं बनता। भूमि, संस्कृति और सुरक्षा उसके महत्वपूर्ण आयाम हैं। उन्होंने कहा कि विशाल भारत की अवधारणा को समझना राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक परिप्रेक्ष्य को समझने के लिए भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण को केंद्र में रखकर व्याख्यान आयोजित किया गया।
कार्यक्रम के अंत में मंच के जयपुर चैप्टर के महासचिव पुष्कर उपाध्याय ने अतिथियों और उपस्थित श्रोताओं का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. मीना रानी ने किया।
इस अवसर पर लेफ्टिनेंट जनरल अनुज माथुर, राजन सिंह, पूर्व कुलपति भगीरथ चौधरी, अनिरुद्ध सिंह, सुश्री नर्बदा इंदौरिया और झामन टेकचंदानी सहित कई गणमान्यजन उपस्थित रहे।
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