राजस्थान ACB ने सोमवार को जयपुर और बांसवाड़ा में दो अलग ट्रैप कार्रवाई की। जयपुर में JEN 3 हजार और बागीदौरा में वरिष्ठ सहायक समेत 3 लोग 4 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार हुए।
जयपुर। सोमवार को राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ एसीबी ने एक साथ दो जगह जाल बिछाया और सरकारी तंत्र के दो अलग-अलग चेहरों पर कार्रवाई की। जयपुर में 3 हजार रुपये लेते बिजली विभाग का जेईएन पकड़ा गया तो बांसवाड़ा के बागीदौरा में 4 हजार रुपये की रिश्वत लेते तहसील कार्यालय का वरिष्ठ सहायक अपने दो कथित दलालों के साथ दबोचा गया।
एक मामले में सोलर सिस्टम लगाने के लिए बिजली का लोड बढ़वाने की कीमत तय हुई थी, तो दूसरे में होम लोन के लिए रजिस्टर्ड मॉर्टगेज की फाइल आगे बढ़ाने के बदले रकम मांगी जा रही थी।
पहले मामला जयपुर का… 5 हजार से शुरू हुई सौदेबाजी 3 हजार पर रुकी
जयपुर में कार्रवाई रामगंज सब स्टेशन, जयपुर डिस्कॉम में तैनात कनिष्ठ अभियंता मनोज कुमार के खिलाफ हुई। एसीबी के मुताबिक शिकायतकर्ता की कंपनी के एक ग्राहक के आवासीय बिजली कनेक्शन पर 10 किलोवाट का सोलर सिस्टम लगाया जाना था। इसके लिए लोड क्षमता बढ़वाने के बदले जेईएन ने कथित तौर पर 5 हजार रुपये मांगे थे।
बातचीत के बाद सौदा 3 से 4 हजार रुपये के बीच तय हुआ। शिकायत की पुष्टि होने के बाद एसीबी ने सोमवार को जाल बिछाया और 3 हजार रुपये लेते मनोज कुमार को रंगे हाथ पकड़ लिया। रिश्वत की रकम बरामद कर ली गई है। अब एसीबी यह भी पड़ताल कर रही है कि इस मामले में किसी और व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।
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बांसवाड़ा में फाइल रोकने-चलाने का खेल?
दूसरी कार्रवाई बागीदौरा तहसील कार्यालय में हुई, जहां मामला सीधे होम लोन से जुड़ी पत्रावलियों का था। एसीबी के अनुसार वरिष्ठ सहायक योगेंद्र सिंह भाटी दो रजिस्ट्री पत्रावलियों को रजिस्टर्ड मॉर्टगेज करवाने और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने की एवज में रिश्वत मांग रहा था। आरोप है कि रकम खुद लेने के बजाय उसने रतन सिंह और विट्ठल के जरिए 4 हजार रुपये लिए। एसीबी ने तीनों को एक साथ रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। यहां खास बात यह है कि मामला किसी बड़ी रकम का नहीं, बल्कि सिर्फ 4 हजार रुपये में अटका हुआ था—लेकिन फाइल आगे बढ़ाने के लिए सरकारी दफ्तर की पूरी कड़ी सक्रिय थी।
एक तरफ सोलर कनेक्शन, दूसरी तरफ बैंक लोन की फाइल
एसीबी की दोनों कार्रवाइयों को साथ रखकर देखें तो रिश्वत के मामलों में एक पैटर्न साफ दिखाई देता है। एक जगह बिजली विभाग की प्रक्रिया के बीच रकम मांगी गई, दूसरी जगह तहसील से जुड़े कागजात और मॉर्टगेज प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के नाम पर। यानी रकम भले ही छोटी रही, लेकिन दोनों मामलों में सरकारी प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के बदले पैसे मांगने के आरोप सामने आए हैं। जयपुर मामले में डीआईजी ओमप्रकाश मीणा के निर्देश पर एएसपी मनोज कुमार गुप्ता के नेतृत्व में कार्रवाई हुई, जबकि पुलिस निरीक्षक रामजी लाल ट्रैप टीम का नेतृत्व कर रहे थे।
ACB ने दी यह अहम चेतावनी
इस कार्रवाई के बीच एसीबी ने एक जरूरी बात भी स्पष्ट की है। यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ एसीबी में अभियोग, प्राथमिक जांच या परिवाद दर्ज है, तो वह सीधे एसीबी से संपर्क कर अपना पक्ष और स्पष्टीकरण दे सकता है। विभाग के अनुसार स्पष्टीकरण लेने के बाद ही आगे के अनुसंधान को लेकर निर्णय किया जाता है।
यह चेतावनी खास तौर पर उन मामलों को लेकर महत्वपूर्ण है, जहां एसीबी के नाम का डर दिखाकर लोगों से धोखाधड़ी किए जाने की आशंका रहती है।
फिलहाल दोनों मामलों में आरोपियों से पूछताछ जारी है और आगे की कानूनी कार्रवाई भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत की जाएगी।
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