वैर नगरपालिका चुनाव 2026 में नाम वापसी के बाद 25 वार्डों में 134 प्रत्याशी मैदान में हैं। भाजपा-कांग्रेस के साथ निर्दलीयों ने मुकाबला रोचक बना दिया है।
वैर। नगरपालिका चुनाव 2026 को लेकर नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होते ही वैर में चुनावी तस्वीर साफ हो गई है। नगरपालिका के 25 वार्डों में अब 134 प्रत्याशी मैदान में हैं। नामांकन के दौरान 172 प्रत्याशियों ने कुल 179 नामांकन पत्र दाखिल किए थे। इनमें से एक नामांकन पत्र निरस्त हुआ, जबकि 38 प्रत्याशियों ने नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद अब 134 उम्मीदवारों के बीच मुकाबला होगा।
नामांकन वापसी के साथ ही वैर की चुनावी राजनीति में हलचल और तेज हो गई है। भाजपा और कांग्रेस जहां अपने-अपने प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाने में जुटी हैं, वहीं बड़ी संख्या में निर्दलीय प्रत्याशियों की मौजूदगी ने मुकाबले को कई वार्डों में दिलचस्प बना दिया है। ऐसे में इस बार चुनावी गणित केवल दो प्रमुख दलों के बीच सीधी टक्कर तक सीमित रहने के बजाय कई जगह त्रिकोणीय मुकाबले का रूप ले सकता है।
चेयरमैन की कुर्सी पर भी नजर
वैर नगरपालिका अध्यक्ष का पद इस बार सामान्य महिला के लिए आरक्षित है। ऐसे में दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के भीतर अध्यक्ष पद को लेकर भी रणनीति बनने लगी है। पार्टी स्तर पर बैठकों और संभावित समीकरणों पर चर्चा का दौर शुरू हो चुका है। हर दल की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा पार्षद उसके खेमे में पहुंचें, ताकि अध्यक्ष पद की दौड़ में उसकी स्थिति मजबूत रहे।
लेकिन निर्दलीय प्रत्याशियों की मजबूत मौजूदगी ने इस पूरी तस्वीर को और पेचीदा कर दिया है। वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवारों का प्रदर्शन चुनाव परिणाम के बाद अध्यक्ष पद के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
पांच साल बाद फिर वही सवाल—किसे चुनेंगे वार्डवासी?
इस चुनाव में सिर्फ राजनीतिक दलों की रणनीति ही चर्चा में नहीं है। पिछले पांच वर्षों में वार्डों की स्थिति और पार्षदों की भूमिका को लेकर भी कस्बे में सवाल उठ रहे हैं।
वरिष्ठ पत्रकार मुरारी शर्मा एडवोकेट ने अपने विचार में आरोप लगाया है कि पिछले चुनाव में जीतने वाले कई पार्षदों ने बाद में अपने वार्ड की जिम्मेदारियों से दूरी बना ली। उनके मुताबिक, मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए कई जगह वार्डवासियों को खुद संघर्ष करना पड़ा।
उनका कहना है कि चुनाव नजदीक आते ही एक बार फिर मतदाताओं से संपर्क बढ़ गया है और उम्मीदवारों की ओर से तरह-तरह के आश्वासन दिए जा रहे हैं। शर्मा ने मतदाताओं से अपील की है कि वे किसी लालच या तात्कालिक लाभ के बजाय ऐसे उम्मीदवार को चुनें जो शिक्षित हो, योग्य हो और पूरे पांच साल वार्ड की समस्याओं के समाधान के लिए उपलब्ध रहे।
‘थोड़े से लालच का खामियाजा पांच साल भुगतना पड़ सकता है’
मुरारी शर्मा के मुताबिक, मतदाताओं का एक गलत फैसला पूरे पांच साल के विकास पर असर डाल सकता है। उन्होंने अपने लेख में चेतावनी भरे अंदाज में कहा है कि यदि मतदाता थोड़े से लालच में गलत प्रत्याशी का चुनाव करते हैं तो बाद में वार्ड के विकास की उम्मीद करना मुश्किल हो सकता है।
अपने तीखे राजनीतिक विश्लेषण में उन्होंने चुनाव के बाद पार्षदों की संभावित खरीद-फरोख्त और राजनीतिक सौदेबाजी की आशंका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि पिछले करीब दस वर्षों के आम अनुभव को देखते हुए चुनाव के बाद पार्षदों के पाला बदलने और राजनीतिक समीकरणों में भ्रष्टाचार के प्रभाव की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब फैसला वैर की जनता के हाथ में
नामांकन वापसी के बाद अब वैर के 25 वार्डों में चुनावी मैदान पूरी तरह तैयार है। भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय प्रत्याशी अपने-अपने समीकरणों के साथ मतदाताओं के बीच पहुंचेंगे। इसके बाद 14 तारीख को होने वाला मतदान यह तय करेगा कि वार्डों की जनता किसे अपना प्रतिनिधि चुनती है।
इस चुनाव में असली परीक्षा सिर्फ प्रत्याशियों की नहीं, बल्कि मतदाताओं के सामने भी है—पांच साल के कामकाज के अनुभव को तौलकर फैसला होगा या चुनावी वादे और तत्काल फायदे बाजी मारेंगे?
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