हिमाचल के हमीरपुर में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 78 वर्षीय बुजुर्ग से 70 लाख रुपये ठगने की कोशिश हुई। PNB बैंक अधिकारियों की सतर्कता से रकम बच गई।
हमीरपुर। व्हाट्सऐप पर पुलिस अधिकारी की तस्वीर और नाम देखकर एक 78 वर्षीय बुजुर्ग इतना डर गया कि साइबर ठगों के कहने पर 70 लाख रुपये ट्रांसफर करने की तैयारी कर बैठा। ठग लगातार उसे गिरफ्तारी का डर दिखा रहे थे और रकम ट्रांसफर नहीं करने पर कार्रवाई की धमकी दे रहे थे।
लेकिन ऐन वक्त पर पीएनबी की भूंपल शाखा के अधिकारियों को 70 लाख रुपये के ट्रांजेक्शन पर शक हो गया। बैंक अधिकारियों ने बुजुर्ग के बेटे से संपर्क किया और फिर पूछताछ में पूरा मामला सामने आ गया। बैंक की सतर्कता ने बुजुर्ग की जिंदगी की बड़ी जमा पूंजी को ठगों के हाथों में जाने से बचा लिया।
पहले खाते से पैसे आए, फिर दूसरे खाते में भेजने की तैयारी
मामला 25 अगस्त से शुरू हुआ। बुजुर्ग ने अपने दूसरे बैंक खाते से बड़ी रकम पीएनबी खाते में ट्रांसफर करने और इसके बाद उसे एक कंपनी के खाते में भेजने के बारे में बैंक से जानकारी ली थी। उस समय उसने बैंक को बताया था कि पैसे बेटे के लिए फ्लैट खरीदने में इस्तेमाल किए जाने हैं।
इसके बाद 29 अगस्त को उसने 70 लाख रुपये भूंपल शाखा के खाते में जमा करवाए। जमा रकम को आईसीआईसीआई बैंक के खाते में ट्रांसफर करने का आग्रह किया गया।
इतनी बड़ी रकम के ट्रांसफर ने बैंक अधिकारियों को सतर्क कर दिया। उन्होंने लेनदेन की वास्तविक वजह जानने के लिए बुजुर्ग के बेटे से संपर्क किया।
19 अगस्त से आ रही थी ‘पुलिस अधिकारी’ की कॉल
31 अगस्त को बुजुर्ग दोबारा बैंक पहुंचा तो अधिकारियों ने उससे पूरे लेनदेन के बारे में जानकारी ली। यहीं से ठगी की पूरी कहानी सामने आई। बुजुर्ग ने बताया कि 19 अगस्त से उसे व्हाट्सऐप पर एक व्यक्ति की कॉल आ रही थी, जो खुद को पुलिस अधिकारी बता रहा था। कॉल में पुलिस अधिकारी की तस्वीर और नाम का इस्तेमाल किया जा रहा था। कथित पुलिस अधिकारी बुजुर्ग को लगातार धमका रहा था। उससे कहा जा रहा था कि अगर बताए गए खाते में पैसे ट्रांसफर नहीं किए तो उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। यानी ठगों ने बुजुर्ग को इतना डरा दिया था कि वह अपनी रकम खुद उनके बताए खाते में भेजने की तैयारी कर चुका था।
बैंक ने समझाया- यह ‘डिजिटल अरेस्ट’ का जाल है
बैंक अधिकारियों ने बुजुर्ग को समझाया कि वह किसी पुलिस कार्रवाई में नहीं, बल्कि साइबर ठगों के ‘डिजिटल अरेस्ट’ वाले जाल में फंसाया जा रहा है। मामले की सच्चाई सामने आने के बाद बुजुर्ग ने ठगों के बताए खाते में रकम भेजने के बजाय 70 लाख रुपये की एफडी करवा दी। इस तरह उसकी पूरी रकम सुरक्षित बच गई। शाखा प्रबंधक अंकिता संदल, उप प्रबंधक मीनाक्षी शर्मा और संजय सूद के मुताबिक बड़ी रकम के ट्रांसफर को लेकर बरती गई सावधानी ही इस मामले में सबसे अहम साबित हुई।
‘पुलिस डिजिटल अरेस्ट नहीं करती’
एसपी हमीरपुर बलवीर ठाकुर ने लोगों को सतर्क करते हुए कहा है कि पुलिस डिजिटल अरेस्ट नहीं करती। पुलिस या किसी अधिकारी के नाम पर आने वाली ऐसी संदिग्ध कॉल से घबराने के बजाय तत्काल बैंक और पुलिस को सूचना देनी चाहिए।
इस मामले में अगर बैंक अधिकारियों ने 70 लाख रुपये के ट्रांसफर पर सवाल नहीं उठाया होता, तो बुजुर्ग अपनी रकम साइबर ठगों के हाथों गंवा सकता था। एक बैंक की सतर्क नजर ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली 70 लाख की ठगी को होने से पहले ही रोक दिया।
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