मेडिकल कॉलेजों में अनुभवी शिक्षकों की कमी के बीच DMA India ने वरिष्ठ चिकित्सा शिक्षकों की ऊपरी आयु सीमा बढ़ाने या खत्म करने की मांग की है। संगठन ने 75 साल तक सेवा जारी रखने का सुझाव दिया।
नई दिल्ली। देश के मेडिकल कॉलेजों में अनुभवी और योग्य चिकित्सा शिक्षकों की कमी को लेकर डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन (DMA India) ने केंद्र सरकार के सामने एक अहम मांग रखी है। एसोसिएशन ने वरिष्ठ चिकित्सा शिक्षकों के लिए लागू ऊपरी आयु सीमा को हटाने या पर्याप्त रूप से बढ़ाने की मांग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजा है। DMA ने अंतरिम व्यवस्था के तौर पर 75 वर्ष तक योग्य वरिष्ठ शिक्षकों को सेवा जारी रखने की अनुमति पर विचार करने का सुझाव दिया है।
एसोसिएशन का तर्क है कि मेडिकल शिक्षा में सिर्फ कॉलेजों की संख्या, सीटें और इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। अनुभवी शिक्षक तैयार करने में वर्षों लगते हैं और उनका चिकित्सकीय तथा शैक्षणिक अनुभव सीधे तौर पर अगली पीढ़ी के डॉक्टरों के प्रशिक्षण में काम आता है।
DMA के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास, राष्ट्रीय महासचिव डॉ. शुभ प्रताप सोलंकी और राष्ट्रीय मुख्य सदस्य डॉ. आर्यन श्रीवास्तव की ओर से भेजे गए पत्र की प्रतिलिपि केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के अध्यक्ष को भी भेजी गई है।
उम्र नहीं, योग्यता और क्षमता बने आधार
DMA के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास ने कहा कि किसी वरिष्ठ चिकित्सा शिक्षक का अनुभव केवल उम्र बढ़ने के साथ खत्म नहीं हो जाता। उनके अनुसार यदि शिक्षक स्वस्थ, सक्षम, योग्य और पढ़ाने के लिए इच्छुक है तो केवल आयु के आधार पर उसके अनुभव का उपयोग रोकना उचित नहीं होगा। एसोसिएशन ने इसी आधार पर 75 वर्ष तक सेवा जारी रखने की अंतरिम व्यवस्था का सुझाव दिया है। हालांकि, इसके लिए शारीरिक स्वास्थ्य, शैक्षणिक योगदान, पेशेवर क्षमता और संस्थान की जरूरत का समय-समय पर मूल्यांकन करने की बात कही गई है। यानी DMA की मांग सभी वरिष्ठ शिक्षकों को बिना किसी जांच के सेवा में बनाए रखने की नहीं है। संगठन चाहता है कि उम्र के बजाय योग्यता और वास्तविक योगदान को सेवा जारी रखने के फैसले में महत्व दिया जाए।
दशकों का अनुभव एक दिन में तैयार नहीं होता
DMA के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. शुभ प्रताप सोलंकी ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा की मजबूती के लिए शिक्षक, आधारभूत ढांचा और चिकित्सकीय अनुभव तीनों जरूरी हैं। उनके मुताबिक इमारत और सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं, लेकिन दशकों के अनुभव वाला चिकित्सा शिक्षक तैयार करने में लंबा समय लगता है।
उन्होंने कहा कि वरिष्ठ शिक्षकों के अनुभव का इस्तेमाल युवा डॉक्टरों की शिक्षा, प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और व्यावहारिक कौशल विकसित करने में किया जा सकता है।
केंद्र और NMC के सामने रखीं तीन प्रमुख मांगें
DMA ने सरकार और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के सामने मुख्य रूप से तीन मांगें रखी हैं—
- वरिष्ठ चिकित्सा शिक्षकों की निर्धारित ऊपरी आयु सीमा को समाप्त या पर्याप्त रूप से बढ़ाया जाए।
- अंतरिम व्यवस्था के तौर पर 75 वर्ष तक योग्य वरिष्ठ शिक्षकों को सेवा जारी रखने की अनुमति पर विचार किया जाए।
- सेवा विस्तार का आधार केवल उम्र नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, योग्यता, क्षमता और शैक्षणिक योगदान बनाया जाए।
अब नीति पर पुनर्विचार की मांग
DMA का कहना है कि जो वरिष्ठ शिक्षक अभी भी स्वस्थ, सक्षम और शिक्षण के लिए इच्छुक हैं, उनके अनुभव का इस्तेमाल चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में किया जा सकता है। एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और NMC से मौजूदा व्यवस्था पर व्यापक पुनर्विचार कर आवश्यक नीतिगत बदलाव करने का आग्रह किया है।
इस मांग का मूल सवाल यही है कि क्या एक अनुभवी चिकित्सा शिक्षक के लिए उम्र अपने आप सेवा समाप्त करने का आधार होनी चाहिए, या स्वास्थ्य, योग्यता और शैक्षणिक योगदान को भी बराबर महत्व मिलना चाहिए? DMA ने सरकार के सामने इसी मुद्दे पर नीति में बदलाव का प्रस्ताव रखा है।
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