जयपुर की बैंक लूट में भरतपुर की युवती का बड़ा कनेक्शन, बॉयफ्रेंड तक पहुंची बैंक की अंदरूनी जानकारी | 41.70 लाख की लूट में कमरे से मिले 26.80 लाख

जयपुर में 41.70 लाख रुपए की बैंक कैश लूट के मामले में भरतपुर की युवती अंशु कुमारी गिरफ्तार हुई है। पुलिस ने कमरे से 26.80 लाख रुपए बरामद किए।

जयपुर। राजधानी जयपुर में बैंक ऑफ इंडिया के एटीएम से निकालने के दौरान  41.70 लाख रुपए की लूट ने पुलिस जांच को कई जिलों तक पहुंचा दिया है। इस मामले में पुलिस ने भरतपुर की रहने वाली 22 वर्षीय युवती अंशु कुमारी जाटव को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक अंशु ने अपने बॉयफ्रेंड और उसके दो साथियों के साथ मिलकर लूट की पूरी योजना में भूमिका निभाई। उसके किराए के कमरे से पुलिस ने 26.80 लाख रुपए बरामद किए हैं।

मामले की जांच में एक अहम कड़ी बैंक से बाहर आई जानकारी के रूप में सामने आई है। पुलिस के अनुसार अंशु के बॉयफ्रेंड मस्तराम मीणा को एक बैंक कर्मचारी से एटीएम में जमा होने वाली नकदी को बैंक शाखा तक ले जाने की प्रक्रिया की जानकारी मिली थी। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि बैंक कर्मचारी की इस मामले में वास्तव में क्या भूमिका थी।

भरतपुर की युवती अंशु कुमारी

भरतपुर की युवती पर पुलिस की नजर कैसे गई?

जयपुर (पूर्व) डीसीपी रंजीता शर्मा के अनुसार वारदात अक्षयपात्र मंदिर के पास एटीएम से कैश निकालकर बैंक ले जाते समय हुई थी। घटना के बाद पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की और वारदात के समय वहां मौजूद वाहनों तथा लोगों की गतिविधियों की पड़ताल की।

इसी दौरान एक युवती की गतिविधियां पुलिस को संदिग्ध लगीं। डीएसटी के एसआई बन्नालाल, कांस्टेबल हेमंत और राजेश ने युवती के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की और उसका पीछा करते हुए उसके किराए के मकान तक पहुंचे। पूछताछ में उसकी पहचान अंशु कुमारी जाटव, निवासी लालपुरा, भरतपुर के रूप में हुई। वह जयपुर के श्रीकिशनपुरा में किराए के मकान में रह रही थी।

एक जानकारी… और तैयार हो गया लूट का प्लान

पुलिस पूछताछ के अनुसार अंशु का बॉयफ्रेंड मस्तराम मीणा, निवासी मासलपुरा, करौली है। पुलिस का कहना है कि मस्तराम को बैंक कर्मचारी के जरिए यह जानकारी मिली थी कि अक्षयपात्र मंदिर के पास स्थित एटीएम में जमा होने वाली रकम को रोजाना निकालकर बैंक शाखा में पहुंचाया जाता है। पुलिस के मुताबिक उसे यह भी पता चला कि कैश लेने के लिए अक्सर महिला बैंक कर्मचारी आती थीं और उनके साथ एक पुरुष कर्मचारी रहता था, जबकि सुरक्षा के इंतजाम सीमित थे। यही जानकारी आगे की साजिश का आधार बनी। पुलिस के अनुसार मस्तराम ने अंशु के साथ मिलकर लूट की योजना बनाई और करौली निवासी अपने परिचित पुष्पेंद्र मीणा और सुमित जंगम को भी इसमें शामिल कर लिया।

वारदात से एक दिन पहले अंशु की ‘रेकी’

पुलिस के मुताबिक चारों ने अंशु के किराए के कमरे पर बैठकर लूट की योजना तैयार की। पुलिस का कहना है कि पुष्पेंद्र और सुमित के पास हथियार भी थे। योजना को अंजाम देने से पहले 13 सितंबर को अंशु को एटीएम की स्थिति देखने के लिए भेजा गया। पुलिस पूछताछ में अंशु ने बताया कि उसने एटीएम की जांच करने के बाद मस्तराम और उसके साथियों को बताया कि सब कुछ योजना के मुताबिक है। इसके बाद 14 सितंबर को अंशु को दोबारा रेकी की जिम्मेदारी दी गई। उसे एटीएम से कैश लेने आने वाले बैंक कर्मचारियों की गतिविधियों पर नजर रखने और सही समय की जानकारी अपने साथियों तक पहुंचाने को कहा गया।

10:30 बजे आया कैश… और शुरू हो गया खेल

पुलिस के अनुसार वारदात वाले दिन करीब 10:30 बजे दो महिला और एक पुरुष बैंक कर्मचारी एटीएम से रकम लेने पहुंचे। अंशु ने कथित तौर पर इसकी सूचना मस्तराम, पुष्पेंद्र और सुमित को दी और वहां से निकल गई। इसके बाद दो बदमाश एटीएम से निकाले गए रुपयों से भरा बैग लेकर बाइक से फरार हो गए। उनका एक साथी पहले से कुछ दूरी पर कार लेकर खड़ा था। आगे जाकर बाइक सवार बदमाशों ने रुपयों से भरा बैग कार में शिफ्ट कर दिया। पुलिस के मुताबिक कार में ही लूट की रकम के दो हिस्से किए गए। एक हिस्सा अंशु के किराए के कमरे पर रख दिया गया, जबकि बाकी रकम लेकर तीनों युवक कपड़े बदलकर वहां से निकल गए।

कमरे में छिपे थे 26.80 लाख

जांच के दौरान पुलिस ने अंशु को गिरफ्तार किया। उसकी निशानदेही पर उसके किराए के कमरे से 26.80 लाख रुपए बरामद किए गए। पुलिस अब लूटी गई बाकी रकम की बरामदगी के लिए प्रयास कर रही है। मामले में मस्तराम मीणा, पुष्पेंद्र मीणा और सुमित जंगम की तलाश की जा रही है। तीनों करौली जिले के रहने वाले बताए गए हैं।

वहीं, इस पूरी कहानी में बैंक कर्मचारी की भूमिका पुलिस जांच का एक अलग महत्वपूर्ण बिंदु बनी हुई है। पूछताछ में बैंक कर्मचारी से मस्तराम तक कैश ले जाने की जानकारी पहुंचने की बात सामने आई है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि बैंक कर्मचारी की भूमिका महज जानकारी देने तक थी या इसके पीछे कोई और कड़ी भी जुड़ी हुई है।

पुलिस के अनुसार पूछताछ में यह भी सामने आया है कि अंशु, मस्तराम, पुष्पेंद्र और सुमित पर कर्ज था और उसे चुकाने के लिए कथित तौर पर लूट की योजना बनाई गई। अब पुलिस फरार आरोपियों की गिरफ्तारी, शेष रकम की बरामदगी और बैंक कर्मचारी की भूमिका की जांच पर आगे बढ़ रही है।

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