₹15 हजार वाली सीमा अब पुरानी; PF के दायरे में आएंगे ज्यादा कर्मचारी, कैबिनेट के फैसले से बदलेगा EPFO का गणित | 51 लाख नए कर्मचारियों को कवरेज का अनुमान

केंद्रीय कैबिनेट ने EPFO की अनिवार्य कवरेज सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 कर दी है। इससे 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को PF, पेंशन और बीमा सुरक्षा का दायरा मिल सकता है।

नई दिल्ली। नौकरी की शुरुआत में PF कटेगा या नहीं, यह तय करने वाली पुरानी ₹15,000 की वेतन सीमा अब बदलने जा रही है। केंद्रीय कैबिनेट ने EPFO के तहत अनिवार्य कवरेज की वेज सीलिंग को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने को मंजूरी दे दी है। यानी ₹15,000 से अधिक और ₹25,000 तक की बेसिक सैलरी वाले पात्र कर्मचारियों के लिए EPFO के अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा दायरे का रास्ता खुलेगा। सरकार के अनुमान के मुताबिक इससे 51 लाख से ज्यादा अतिरिक्त कर्मचारी इस दायरे में आ सकते हैं।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि इस बदलाव पर सरकार का सालाना खर्च करीब ₹11,339 करोड़ अनुमानित है। यह बदलाव ऐसे समय में किया गया है, जब 2014 में तय की गई ₹15,000 की सीमा मौजूदा वेतन स्तरों के मुकाबले पुरानी पड़ चुकी थी।

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12 साल बाद बदली PF की वेज सीलिंग

EPFO के अनिवार्य कवरेज की मौजूदा ₹15,000 की सीमा सितंबर 2014 में तय की गई थी। इसके बाद करीब 12 साल तक इसमें बदलाव नहीं हुआ। अब सरकार ने इसे ₹25,000 करने का फैसला किया है। सरकार के अनुसार, वेतन में वृद्धि, आय के बदलते स्तर और औपचारिक रोजगार के विस्तार को देखते हुए कवरेज की सीमा को मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप करना जरूरी था।

किस कर्मचारी पर पड़ेगा सीधा असर?

इस फैसले का सबसे सीधा असर उस वेतन वर्ग पर पड़ेगा जो अब तक ₹15,000 की अनिवार्य कवरेज सीमा से ऊपर होने के कारण सामान्य तौर पर EPF के अनिवार्य दायरे में नहीं आता था।

नई सीमा लागू होने के बाद ₹15,000 से ₹25,000 के बीच बेसिक वेतन वाले पात्र नए कर्मचारियों का बड़ा हिस्सा EPFO की अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था में शामिल हो सकेगा। हालांकि EPFO कवरेज से जुड़े मौजूदा प्रावधानों में कुछ अपवाद और अलग व्यवस्थाएं भी हैं, इसलिए हर कर्मचारी पर नियम एक समान तरीके से लागू नहीं होंगे।

सिर्फ PF नहीं, पेंशन और बीमा का दायरा भी बढ़ेगा

इस बदलाव को केवल PF की बचत सीमा में बदलाव के तौर पर देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी। EPFO के तहत Employees’ Provident Fund (EPF) के साथ Employees’ Pension Scheme (EPS) और Employees’ Deposit Linked Insurance Scheme (EDLI) भी संचालित होती हैं।

सरकार के मुताबिक वेज सीलिंग बढ़ने से ज्यादा कर्मचारियों को PF बचत, EPS के तहत पेंशन सुरक्षा और EDLI के तहत बीमा सुरक्षा तक पहुंच मिल सकेगी। इन योजनाओं के लाभ संबंधित योजना के लागू नियमों और पात्रता शर्तों के अनुसार मिलेंगे।

सरकार का खर्च ₹11,339 करोड़ तक पहुंचेगा

नई वेज सीलिंग के कारण सरकार का अनुमानित सालाना खर्च करीब ₹11,339 करोड़ होगा। सरकारी दस्तावेज के मुताबिक मौजूदा वार्षिक बजटीय सहायता करीब ₹10,250 करोड़ है और नई व्यवस्था से पांच साल में अनुमानित खर्च लगभग ₹56,696 करोड़ रह सकता है।

आखिर 25 हजार ही क्यों?

सरकार की दलील है कि कई राज्यों में अनस्किल्ड कर्मचारियों की न्यूनतम मजदूरी अब ₹15,000 से ऊपर पहुंच चुकी है। ऐसे में 2014 में तय वेतन सीमा को उसी स्तर पर बनाए रखना मौजूदा वेतन संरचना के अनुरूप नहीं था। इसी पृष्ठभूमि में अंतर-मंत्रालयी विचार-विमर्श के बाद सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव आगे बढ़ाया गया।

नई व्यवस्था कब से?

सरकार ने 16 सितंबर 2026 को कैबिनेट मंजूरी दी है। नई सीमा को लागू करने के लिए श्रम मंत्रालय और EPFO आवश्यक वैधानिक एवं प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करेंगे। सरकार द्वारा बताई गई व्यवस्था के अनुसार नई वेज सीलिंग 17 सितंबर 2026 से प्रभावी होगी।

यानी आने वाले समय में ₹15,000 से ₹25,000 के बेसिक वेतन वाले कर्मचारियों के लिए PF, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा कवरेज का दायरा पहले से बड़ा होगा। यह बदलाव 2014 के बाद EPFO की अनिवार्य कवरेज सीमा में पहली बड़ी बढ़ोतरी है।

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