भारत में पहली डेंगू वैक्सीन QDENGA को DCGI की मंजूरी मिल गई है। 4 से 60 वर्ष तक के लोग बिना पहले डेंगू की जांच कराए यह वैक्सीन लगवा सकेंगे। जानिए डोज, खासियत और पूरी जानकारी।
नई दिल्ली। देश में हर साल हजारों लोगों को अपनी चपेट में लेने वाले डेंगू के खिलाफ भारत ने एक ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने देश की पहली डेंगू वैक्सीन ‘QDENGA’ के कमर्शियल इस्तेमाल को हरी झंडी दे दी है। टाकेडा बायोफार्मास्यूटिकल्स (Takeda Biopharmaceuticals) द्वारा तैयार की गई यह वैक्सीन भारत में डेंगू के बढ़ते मामलों पर लगाम लगाने में गेमचेंजर साबित हो सकती है।
न टेस्ट का झंझट, न पुराना रिकॉर्ड: हर किसी के लिए असरदार
इस वैक्सीन की सबसे बड़ी खासियत इसका ‘यूनिवर्सल अप्रोच’ है। आमतौर पर डेंगू की वैक्सीनों के साथ यह डर रहता था कि जिसे पहले डेंगू नहीं हुआ, उसे वैक्सीन देने पर जोखिम बढ़ सकता है। लेकिन QDENGA के साथ ऐसा नहीं है:
कोई प्री-टेस्टिंग नहीं: वैक्सीन लगवाने से पहले यह जांचने की बिल्कुल जरूरत नहीं होगी कि आपको पहले कभी डेंगू हुआ है या नहीं।
उम्र सीमा: इसे 4 साल के बच्चे से लेकर 60 साल तक के बुजुर्गों को लगाया जा सकेगा।
चारों वेरिएंट्स पर वार: भारत में डेंगू वायरस के सभी 4 प्रकार (Serotypes) पाए जाते हैं, और यह वैक्सीन इन चारों के खिलाफ मजबूत सुरक्षा चक्र तैयार करती है।
28,000 लोगों पर ट्रायल, 43 देशों में पहले से ही सुपरहिट
वैक्सीन को हवा में मंजूरी नहीं मिली है, बल्कि इसके पीछे एक लंबा और पुख्ता वैज्ञानिक रिसर्च है:
दुनिया भर में हुए 19 वैश्विक क्लीनिकल ट्रायल्स के डेटा के आधार पर भारत ने इसे पास किया है।
इन परीक्षणों में 28,000 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया, जिसमें भारत में हुआ फेज-3 (DEN-302) ट्रायल भी शामिल है।
7 साल के लंबे फॉलो-अप स्टडी में सामने आया कि यह वैक्सीन डेंगू के कारण अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को बेहद कम कर देती है।
वैश्विक स्तर पर वर्ष 2022 से अब तक इसे 43 देशों में मंजूरी मिल चुकी है और इसकी 3.2 करोड़ से अधिक खुराकें दी जा चुकी हैं।
कैसे दी जाएगी वैक्सीन? समझें इसका पूरा शेड्यूल
डोज और अंतराल: यह वैक्सीन 0.5 मिलीलीटर की मात्रा में दो खुराकों (2 Doses) में दी जाएगी। पहली डोज लगने के ठीक 3 महीने बाद दूसरी डोज लगाना अनिवार्य होगा, तभी यह लंबे समय तक सुरक्षा प्रदान करेगी।
मच्छरों से जंग अभी बाकी है…
टाकेडा के विशेषज्ञों का कहना है कि भारत जैसे देश के लिए, जहाँ डेंगू का बोझ बहुत अधिक है, यह वैक्सीन एक बड़ा हथियार है। हालांकि, एक्सपर्ट्स ने यह भी साफ किया है कि वैक्सीन आने का मतलब यह नहीं कि हम लापरवाह हो जाएं। डेंगू को पूरी तरह हराने के लिए मच्छर नियंत्रण, साफ-सफाई, सरकारी निगरानी और जन-जागरूकता जैसे जमीनी उपाय वैक्सीन के साथ-साथ चलते रहेंगे।
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