राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (Rajasthan International Centre) जयपुर में कलाकार रामखिलाड़ी मीना (Ramkhiladi Meena) की ‘मां’ पेंटिंग ने दर्शकों को भावुक किया, जो एक मजदूर मां के संघर्ष और त्याग की प्रेरक कहानी बयां करती है।
जयपुर
तपती धूप, कंधों पर पत्थर और चेहरे पर अडिग संकल्प—राजस्थान के जाने-माने कलाकार रामखिलाड़ी मीना ने अपने कैनवास पर ‘मां’ को सिर्फ चित्रित नहीं किया, बल्कि उसे जीता-जागता अनुभव बना दिया है। उनकी बनाई पेंटिंग ‘मां’ इन दिनों राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में 17 अप्रैल से 17 मई तक आयोजित राज्य के 50 प्रतिष्ठित कलाकारों की सामूहिक प्रदर्शनी में दर्शकों को भीतर तक झकझोर रही है।
यह पेंटिंग रंगों का साधारण संयोजन नहीं, बल्कि उस हर मां की कहानी है, जो अभावों के बीच अपने बच्चों के सपनों की इमारत खड़ी करती है। चित्र में एक मजदूर मां को भारी पत्थर उठाते हुए दिखाया गया है—लेकिन हैरानी की बात यह है कि उसके चेहरे पर थकान नहीं, बल्कि एक अडिग विश्वास और संकल्प की चमक है। जैसे वह हर पत्थर के साथ अपने बच्चे के भविष्य की नींव मजबूत कर रही हो।
पेंटिंग में उकेरी गई सीढ़ियां बेहद प्रतीकात्मक हैं। हर सीढ़ी उस त्याग, मेहनत और अनगिनत सपनों की कहानी कहती है, जिनके सहारे एक मां अपने बच्चे को ऊंचाइयों तक पहुंचाना चाहती है। ये सीढ़ियां साफ संदेश देती हैं कि सफलता का रास्ता आसान नहीं होता—उसके पीछे किसी मां का लगातार संघर्ष और समर्पण छिपा होता है।
चित्र के एक हिस्से में बच्चे का चेहरा दिखाई देता है, जिसकी आंखों में उज्ज्वल भविष्य के सपनों की चमक है। यह दृश्य साफ कर देता है कि मां की मेहनत सिर्फ आज के लिए नहीं, बल्कि आने वाले कल को संवारने के लिए है। वह अपने बच्चे को केवल जीवन नहीं देती, बल्कि उसे आगे बढ़ने की दिशा भी देती है।
रंगों का चयन इस पेंटिंग की आत्मा है। लाल, पीला और नारंगी जैसे गर्म रंग संघर्ष और तपन को उभारते हैं, जबकि हल्के रंग आशा, विश्वास और उजाले का एहसास कराते हैं। यही संतुलन इस कृति को गहराई और भावनात्मक ताकत देता है।
समग्र रूप से यह पेंटिंग एक संदेश छोड़ जाती है—मां का त्याग अनमोल है, उसका संघर्ष अक्सर अनदेखा रह जाता है, लेकिन वही संघर्ष बच्चों की सफलता की असली नींव बनता है। ‘मां’ केवल एक कला कृति नहीं, बल्कि हर उस स्त्री को समर्पित एक भावनात्मक श्रद्धांजलि है, जो अपने बच्चों के लिए खुद को खपा देती है।
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