यूनेस्को ने दीपावली को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल किया। लाल किले से घोषणा, पीएम मोदी व सीएम रेखा गुप्ता ने इसे भारत की आध्यात्मिक पहचान का वैश्विक सम्मान बताया।
नई दिल्ली
भारत के लिए आज का दिन किसी विजय-घोष से कम नहीं। दिल्ली के लाल किले से एक ऐसी घोषणा हुई जिसने हर भारतीय के सीने को गर्व से चौड़ा कर दिया —यूनेस्को ने दीपावली को आधिकारिक तौर पर मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Cultural Heritage) की सूची में शामिल कर लिया है। यानी अब दीपावली सिर्फ भारत की नहीं, दुनिया की रोशनी बन गई है।
लाल किले में चल रहे यूनेस्को की अंतर सरकारी समिति के 20वें सत्र के बीच जब भारत का नाम पुकारा गया, तो माहौल तालियों से गूंज उठा। यह त्योहार, जो पीढ़ी दर पीढ़ी अच्छाई, सत्य, धर्म और प्रकाश का संदेश देता आया है, अब वैश्विक धरोहर के सिंहासन पर बैठ चुका है।
🔴 BREAKING
— UNESCO 🏛️ #Education #Sciences #Culture 🇺🇳 (@UNESCO) December 10, 2025
New inscription on the #IntangibleHeritage List: Deepavali, #India🇮🇳.
Congratulations!https://t.co/xoL14QknFp #LivingHeritage pic.twitter.com/YUM7r6nUai
पीएम मोदी बोले—यह त्योहार नहीं, हमारी सभ्यता की आत्मा है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस फैसले पर गहरी खुशी जताते हुए लिखा:
“दीपावली सिर्फ त्योहार नहीं, हमारी संस्कृति और जीवन-मूल्यों की आत्मा है। यूनेस्को में शामिल होना इसे विश्व पटल पर और लोकप्रिय बनाएगा।”
उन्होंने प्रभु श्रीराम की मर्यादा और आदर्शों को मानवता के लिए अनंतकाल तक मार्गदर्शक बताया।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा—दुनिया ने हमारी सनातन परंपरा की दिव्यता को नमन किया
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह फैसला भारत की हजारों वर्षों पुरानी आध्यात्मिक परंपराओं की वैश्विक स्वीकृति है।
“दीपावली केवल उत्सव नहीं, वह दिव्यता है जिसने सदियों से मानवता को सत्य, आशा और नैतिकता के मार्ग पर चलना सिखाया है। यह उपलब्धि प्रधानमंत्री मोदी के ‘विकास भी, विरासत भी’ संकल्प को मजबूत करती है।”
वैश्विक मंच पर क्या-क्या बदलेगा?
इस मान्यता के साथ दीपावली का दायरा भारत की सीमाओं से आगे बढ़कर पूरी दुनिया तक फैल जाएगा:
- दीपावली को ग्लोबल पहचान
- सांस्कृतिक एक्सचेंज में बढ़ोतरी
- टूरिज्म और रिसर्च को नई उड़ान
- भारत की सांस्कृतिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय मजबूती
भारत की दावेदारी क्यों भारी पड़ी?
यूनेस्को की बैठक में 78 देशों के 67 नामांकन पर चर्चा चली। भारत ने तर्क दिया:
- दीपावली बुराई पर अच्छाई का प्रतीक
- यह त्योहार शांति और समृद्धि का संदेश देता है
- पीढ़ियों से हस्तांतरित यह उत्सव अमूर्त विरासत की परिभाषा पर खरा उतरता है
भारत की जिन परंपराओं को पहले ही यूनेस्को मान्यता दे चुका है
दीपावली से पहले भारत की कुल 15 परंपराएं सूची में थीं—अब यह संख्या 16 हो चुकी है:
- कुंभ मेला
- योग
- गरबा
- दुर्गा पूजा
- रामलीला
- वैदिक मंत्रोच्चार
- छऊ नृत्य
- मुदियेट्टू
- संक्रांति–पोंगल–बैसाखी
- नवरोज
- हिमालयी बौद्ध मंत्र जाप
- अन्य पारंपरिक कला–परंपराएँ
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