‘असतो मा सदगमय’ यही समझाए अंधेरे से उजाले की ओर चलते जाएं
हे आशुतोष मुझे अपना लो अपने जैसा मुझे बना लो
ऐ ज़िन्दगी क्यूं कर रही है परेशान, राह ए हयात कुछ तो कर आसान
पावस ऋतु का पावन माह मनभावन यह सावन माह रिमझिम रिमझिम बरसाए मेह चंहु ओर बिखराए नेह
ईश्वर की सर्वोच्च अनुपम कृति है माँ इस धरा पर स्वयं ईश्वर का प्रतिरूप है माँ ब्रह्मा द्वारा रचित सृष्टि की रचना का सार है माँ
नारी जीवन में हर्षोल्लास का पर्याय है रंग यही रंग देते हैं जीवन को नित नए आयाम
होलिका में दहन कर अपना अहंकार मानवता पर करें हम यह उपकार