आई फागुनी बयार लेकर रंगों का त्यौहार
है गुज़ारिश बंद करो अब नारी की नर से तुलना करना
सोच संकुचित इस जगत की, कैसे करें उम्मीद समता की
कैसे कोई कर सकता है बेटियों का दान?
मौसम की तरह बदलना मेरी फितरत नहीं
मायके आई जब पुत्री नव विवाहित…
योग भगाए रोग…
वीर शिरोमणि, हिन्दुआ सूरज मेवाड़ मुकुट, जयवन्ता पुत्र…
कर के प्रकृति से खिलवाड़ , प्राकृतिक संतुलन दिया बिगाड़…
अहंकार परिचायक दुर्बलता का…