डॉ. विनीता राठौड़ की कविता आवेश में प्रतिक्रिया देने से बचने, धैर्य अपनाने, आत्मनियंत्रण बनाए रखने और रिश्तों को संजोने का संदेश देती है।
Tag: Dr. Vinita Rathore
भविष्य उज्जवल गर है बनाना
भविष्य उज्जवल गर है बनाना
तो छोड़ो परीक्षा से नाहक डरना
थोड़ा तनाव होता है अच्छा
पोषित करें सद्भाव…
ये दुनिया नहीं है विश्राम स्थल
अभीष्ट कर्मों का ये कर्म स्थल
अद्वितीय इसका हर एक कण
इनके सदुपयोग का लें हम प्रण
पोषित करें सद्भाव…
ये दुनिया नहीं है विश्राम स्थल
अभीष्ट कर्मों का ये कर्म स्थल
अद्वितीय इसका हर एक कण
इनके सदुपयोग का लें हम प्रण
प्रभु-सहचर्य
चौरासी लाख योनियों में से एक
अति दुर्लभ है मानव योनि एक
है इस में इच्छा और कर्म का संपूर्ण समावेश
