सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल सरकार की SLP खारिज कर कर्मचारियों की वरिष्ठता और सेवा लाभ से जुड़े 2024 के कानून को रद्द करने वाले हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार को सरकारी कर्मचारियों के सबसे चर्चित मामलों में से एक में बड़ा कानूनी झटका लगा है। कर्मचारियों की वरिष्ठता और सेवा लाभ तय करने के लिए बनाया गया राज्य सरकार का कानून अब पूरी तरह बेअसर हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की चुनौती खारिज करते हुए साफ कर दिया कि इस मामले में हिमाचल हाईकोर्ट का फैसला ही लागू रहेगा। इस फैसले के बाद हजारों सरकारी कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
सरकार ने कानून बनाकर बदलना चाहा था खेल
सरकार ने दिसंबर 2024 में हिमाचल प्रदेश सरकारी कर्मचारी भर्ती एवं सेवा शर्तें अधिनियम-2024 लागू किया था। इस कानून के जरिए कर्मचारियों की वरिष्ठता और वित्तीय लाभ तय करने का नया आधार बनाया गया, लेकिन कई कर्मचारियों ने इसे अदालत में चुनौती दे दी। उनका आरोप था कि सरकार न्यायालय के पुराने फैसलों के प्रभाव को खत्म करना चाहती है।
हाईकोर्ट ने कहा- कानून टिक नहीं सकता
25 अप्रैल 2026 को हिमाचल हाईकोर्ट की खंडपीठ ने देवेंद्र कुमार बनाम हिमाचल प्रदेश सरकार मामले में सुनवाई करते हुए पूरे अधिनियम को रद्द कर दिया। न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रोमेश वर्मा की पीठ ने माना कि यह कानून कर्मचारियों के अधिकारों के अनुरूप नहीं है।
अब सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार को नहीं दी राहत
हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची, लेकिन यहां भी उसे राहत नहीं मिली। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ ने सरकार की विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज कर दी। इसके साथ ही हाईकोर्ट का फैसला अंतिम रूप से प्रभावी हो गया।
क्या है पूरा विवाद?
हिमाचल प्रदेश में अलग-अलग समय पर नियुक्त कर्मचारियों को अलग-अलग अवधि के बाद नियमित किया गया। पहले 8 साल, फिर 6 साल, उसके बाद 5 साल और अब 3 साल की अनुबंध अवधि के बाद नियमित करने की व्यवस्था लागू हुई। इसी वजह से वरिष्ठता और वित्तीय लाभ को लेकर विवाद पैदा हुआ।
इससे पहले तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एम.एस. रामचंद्र राव की पीठ ने कर्मचारियों को नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता और वित्तीय लाभ देने का आदेश दिया था। इसके बाद सरकार नया कानून लेकर आई, लेकिन अदालत ने उसे भी निरस्त कर दिया।
सरकार के लिए मुश्किल, कर्मचारियों के लिए राहत
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब राज्य सरकार के सामने कर्मचारियों की वरिष्ठता और वित्तीय लाभ से जुड़े मामलों का समाधान न्यायालय के आदेशों के अनुरूप करना होगा। माना जा रहा है कि इस फैसले का असर बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों पर पड़ेगा और लंबित मामलों के निस्तारण का रास्ता भी साफ होगा।
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