जयपुर नगर निगम वार्ड 62 के एक बूथ पर 110 विलोपित मतदाताओं के मतदान की रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग ने 13 सितंबर को पुनर्मतदान के आदेश दिए हैं।
जयपुर। नगर निगम जयपुर के वार्ड संख्या 62 के भाग संख्या 23 में हुए मतदान को लेकर चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला लिया है। मतदान के दौरान मतदाता सूची से विलोपित किए जा चुके 110 मतदाताओं के वोट डालने की रिपोर्ट सामने आने के बाद आयोग ने इस बूथ पर पुनर्मतदान कराने के आदेश दिए हैं। साथ ही मतदान प्रक्रिया में हुई गंभीर चूक की प्रारंभिक जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं।
मामला नगर निगम जयपुर के वार्ड संख्या 62 के भाग संख्या 23 के मतदान केंद्र राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, कमरा नंबर 4, टीला वाला, सांगानेर स्थित मतदान केंद्र से जुड़ा है। यहां 11 सितंबर 2026 को हुए मतदान के दौरान 110 विलोपित मतदाताओं के मतदान प्रक्रिया में हिस्सा लेने की रिपोर्ट जिला निर्वाचन अधिकारी और रिटर्निंग अधिकारी की ओर से आयोग को भेजी गई थी।
आयोग ने मामले को सामान्य तकनीकी गलती मानने के बजाय इसे गंभीरता से लिया। आदेश में साफ कहा गया है कि मतदान से पहले मतदाता को अनुमति देने से पूर्व मूल मतदाता सूची में उसका नाम और क्रमांक जांचना जरूरी था। मतदानकर्मियों द्वारा पहचान सत्यापित करने के बाद ही मतदाता को वोट डालने की अनुमति दी जानी चाहिए थी। लेकिन विलोपित सूची के 110 मतदाताओं का मतदान प्रक्रिया में शामिल होना इस पूरी प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही की ओर इशारा करता है। आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि मामले की प्रारंभिक जांच कराई जाए और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही की गई कार्रवाई से आयोग को अवगत कराने को कहा गया है।
अब उसी बूथ पर 13 सितंबर को फिर खुलेंगे वोटिंग के दरवाजे
आयोग ने राजस्थान नगरपालिका (निर्वाचन) नियम, 1994 के नियम 55 में दी गई शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए 13 सितंबर 2026 को पुनर्मतदान (Fresh Poll) कराने का फैसला किया है। पुनर्मतदान सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक होगा। खास बात यह है कि मतदान उसी संबंधित मतदान केंद्र पर कराया जाएगा, जहां पहले मतदान हुआ था। यानी 11 सितंबर को हुए मतदान के बाद अब इस बूथ के चुनावी परिणाम पर आगे बढ़ने के बजाय आयोग ने पूरी मतदान प्रक्रिया को दोबारा कराने का रास्ता चुना है।
किसे मिलेगा दोबारा वोट डालने का मौका?
पुनर्मतदान में सिर्फ वही मतदाता मतदान कर सकेंगे जो मूल मतदान के समय उस बूथ की मतदाता सूची में वैध रूप से दर्ज थे। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि मूल मतदान के दौरान मतदाता की उंगली पर लगाए गए अमिट स्याही के निशान को पुनर्मतदान में आधार नहीं बनाया जाएगा। दोबारा मतदान करने वाले मतदाताओं के बाएं हाथ की मध्यमा (Left Hand Middle Finger) पर अमिट स्याही का निशान लगाया जाएगा।
आयोग ने पुनर्मतदान की तारीख, समय और स्थान की जानकारी चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों और उनके निर्वाचन अभिकर्ताओं को लिखित रूप में देने के निर्देश भी दिए हैं। संबंधित क्षेत्र में ढोल बजाकर अथवा अन्य माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा गया है, ताकि मतदाताओं को नए मतदान की जानकारी मिल सके।
ईवीएम भी रहेगी सुरक्षित
आयोग ने मूल मतदान में इस्तेमाल की गई ईवीएम को सील कर सुरक्षित अभिरक्षा में रखने के निर्देश दिए हैं। पुनर्मतदान के दौरान जरूरत पड़ने पर नई ईवीएम और निर्वाचन सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है।
110 वोटों से शुरू हुआ मामला अब जांच तक पहुंचा
पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यही है कि मतदाता सूची से नाम हटाए जा चुके 110 लोग आखिर मतदान प्रक्रिया तक कैसे पहुंचे और उन्हें वोट डालने की अनुमति कैसे मिल गई? चुनाव आयोग ने इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए प्रारंभिक जांच के निर्देश दे दिए हैं। अब जांच यह तय करेगी कि यह चूक किस स्तर पर हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। दूसरी ओर, प्रभावित बूथ पर 13 सितंबर को होने वाला पुनर्मतदान यह सुनिश्चित करेगा कि संबंधित सीट पर मतदान प्रक्रिया वैध मतदाताओं के आधार पर दोबारा पूरी हो।
यानी 110 संदिग्ध वोटों से शुरू हुआ विवाद अब सिर्फ जांच की फाइल नहीं रहा—इसने पूरे मतदान को ही दोबारा मतदान की स्थिति तक पहुंचा दिया है।
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