सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के TET संबंधी निर्णय को लेकर ABRSM प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Education Minister Dharmendra Pradhan) से मुलाकात की। संगठन ने निर्णय को पूर्वव्यापी रूप से लागू न करने की मांग उठाई।
नई दिल्ली
देशभर में लाखों शिक्षकों के भविष्य को लेकर उठे सवाल अब सीधे सत्ता के गलियारों तक पहुंच गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के TET संबंधी हालिया निर्णय के बाद शिक्षक संगठनों में बढ़ती बेचैनी के बीच अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM) ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात कर साफ शब्दों में कहा—अगर फैसला पीछे की तारीख से लागू हुआ, तो शिक्षा व्यवस्था में बड़ा भूचाल आ सकता है।
शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर माननीय सर्वोच्च न्यायालय के 1 सितंबर 2025 के निर्णय के बाद देशभर में उत्पन्न स्थिति को लेकर अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM) का प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने मंत्रालय में भेंट के दौरान इस निर्णय के प्रभावों को लेकर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए समुचित और संतुलित कार्यवाही की मांग की।
महासंघ ने चिंता जताई कि यदि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को नियुक्ति तिथि की परवाह किए बिना सभी सेवारत शिक्षकों पर पूर्वव्यापी रूप से लागू किया गया, तो इसका सीधा असर देशभर के लगभग 12 लाख शिक्षकों की सेवा-सुरक्षा, वरिष्ठता, पदोन्नति और आजीविका पर पड़ेगा। संगठन के अनुसार यह स्थिति न केवल शिक्षकों के मनोबल को तोड़ेगी, बल्कि विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था को भी अस्थिर कर सकती है।
प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री का ध्यान राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना की ओर दिलाया, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया था कि कक्षा I से VIII तक के शिक्षकों के लिए न्यूनतम योग्यताएं अधिसूचना की तिथि से लागू होंगी और उससे पहले नियुक्त शिक्षकों को TET से छूट प्राप्त रहेगी।
महासंघ का कहना था कि वर्षों से सेवा दे रहे अनुभवी शिक्षकों पर, जो उस समय की वैध शैक्षणिक एवं व्यावसायिक योग्यताओं के आधार पर नियुक्त हुए, इस निर्णय को पीछे की तारीख से लागू करना न्याय और व्यवहार—दोनों के विपरीत होगा।
ABRSM ने शिक्षा मंत्री से आग्रह किया कि वे इस विषय में हस्तक्षेप कर निर्णय को केवल भावी रूप से लागू कराने की दिशा में पहल करें, ताकि अधिसूचना से पूर्व नियुक्त शिक्षकों की वरिष्ठता, गरिमा और वैध अपेक्षाएं सुरक्षित रह सकें तथा उन्हें सेवा समाप्ति या पदोन्नति से वंचित होने जैसी स्थितियों का सामना न करना पड़े।
भेंट के दौरान महासंघ ने विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक का स्वागत करते हुए उसके उद्देश्यों की सराहना की और साथ ही विधेयक को अधिक प्रभावी, समावेशी और व्यावहारिक बनाने के लिए कुछ सुधारात्मक सुझाव भी मंत्री के समक्ष रखे। इसके अतिरिक्त उच्च शिक्षा और विद्यालय शिक्षा से जुड़े लंबे समय से लंबित मुद्दों पर एक विस्तृत मांग-पत्र भी सौंपा गया।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने संगठन द्वारा प्रस्तुत तथ्यों और दस्तावेजों को गंभीरता से लेते हुए NCTE के अध्यक्ष और संबंधित अधिकारियों को इस विषय में आवश्यक और समुचित कार्यवाही के निर्देश दिए। मंत्री ने आश्वासन दिया कि शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के साथ-साथ शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े मसलों पर संतुलित और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया जाएगा।
इस प्रतिनिधिमंडल में ABRSM के अध्यक्ष प्रो. नारायण लाल गुप्ता, महासचिव प्रो. गीता भट्ट, संगठन मंत्री महेंद्र कपूर, सह संगठन मंत्री जी. लक्ष्मण, वरिष्ठ उपाध्यक्ष महेंद्र कुमार, विद्यालय शिक्षा प्रभारी शिवानंद सिंदनकेरा, एनआईटी शिक्षक फोरम के संयोजक प्रो. महेंद्र श्रीमाली, तेलंगाना इकाई के अध्यक्ष हनुमंत राव तथा तमिलनाडु इकाई के महासचिव कंदसामी सहित अन्य पदाधिकारी शामिल रहे।
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