2434 करोड़ का बैंक फ्रॉड उजागर, PNB के लोन डूबे, SREI समूह की दो कंपनियां कटघरे में

पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने 2434 करोड़ रुपये के लोन फ्रॉड का खुलासा किया है। मामला SREI Equipment Finance और SREI Infrastructure Finance से जुड़ा है, जिसकी जानकारी RBI को दी गई।

नई दिल्ली 

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंकों में शामिल पंजाब नेशनल बैंक ने 2434 करोड़ रुपये के लोन फ्रॉड का खुलासा कर बैंकिंग सिस्टम को एक बार फिर झकझोर दिया है। मामला उन कंपनियों से जुड़ा है जो कर्ज के बोझ तले दबने के बाद इनसॉल्वेंसी प्रक्रिया तक पहुंचीं, लेकिन अब उनके पुराने घाव फ्रॉड के रूप में सामने आ गए हैं।

पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने 26 दिसंबर को स्टॉक एक्सचेंजों को दी गई आधिकारिक सूचना में बताया कि बैंक ने 2434 करोड़ रुपये के लोन फ्रॉड की पहचान की है और इस संबंध में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को अवगत करा दिया गया है। यह खुलासा सेबी के लिस्टिंग ऑब्लिगेशंस एंड डिसक्लोजर रिक्वायरमेंट रेगुलेशंस, 2015 के तहत किया गया है।

यह मामला SREI Equipment Finance Limited (SEFL) और SREI Infrastructure Finance Limited (SIFL) से जुड़ा है। दोनों कंपनियां आपस में संबद्ध हैं। बैंक के अनुसार, SEFL पर 1241 करोड़ रुपये और SIFL पर 1193 करोड़ रुपये का फ्रॉड सामने आया है।

पीएनबी ने स्पष्ट किया है कि इन दोनों लोन खातों के बकाया अमाउंट के लिए पहले ही प्रोविजनिंग कर ली गई थी। साथ ही, इन कंपनियों को एनसीएलटी के तहत कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस के जरिए पहले ही रिजॉल्व किया जा चुका है।

दरअसल, SREI समूह की ये दोनों कंपनियां लंबे समय से भारी कर्ज संकट में थीं। इन पर कुल मिलाकर करीब 32,700 करोड़ रुपये का वित्तीय कर्ज था। हालात बिगड़ने पर इन्हें इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत समाधान प्रक्रिया में डाला गया। दिसंबर 2023 में इस प्रक्रिया के तहत नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (NARCL) ने इन दोनों कंपनियों का अधिग्रहण किया, जिससे प्रमोटरशिप में बदलाव हुआ।

इस पूरे प्रकरण की जड़ें अक्टूबर 2021 तक जाती हैं, जब RBI ने कुप्रबंधन और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के चलते SIFL और उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी SEFL के बोर्ड को भंग कर दिया था। उस समय कंपनियों का संचालन कोलकाता स्थित कनोरिया परिवार के हाथों में था। बोर्ड हटाए जाने के बाद ही नियामक ने IBC के तहत कार्रवाई शुरू की थी।

SREI समूह की शुरुआत 1989 में एक NBFC के रूप में हुई थी और कई वर्षों तक यह इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग सेक्टर में सक्रिय रहा। लेकिन कमजोर जोखिम प्रबंधन और बढ़ते कर्ज ने कंपनी की स्थिति को लगातार कमजोर किया।

इधर, पीएनबी ने अपने ताजा वित्तीय नतीजों में मजबूत प्रदर्शन की जानकारी भी दी है। वित्त वर्ष 2025-26 की जुलाई-सितंबर तिमाही में बैंक का शुद्ध मुनाफा बढ़कर 4904 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं, 26 दिसंबर को पीएनबी का शेयर 0.56 प्रतिशत गिरकर 120.25 रुपये पर बंद हुआ।

यह मामला एक बार फिर बैंकिंग सेक्टर में कर्ज निगरानी और कॉरपोरेट गवर्नेंस की अहमियत को रेखांकित करता है, जहां नियामकों की सख्ती लगातार बढ़ती जा रही है।

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