पेपरलीक की स्याही में डूबी पूरी भर्ती | हाईकोर्ट ने रद्द की SI भर्ती-2021, हजारों चयनितों के सपने फिर अधर में

राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) की खंडपीठ ने पेपरलीक और धांधली के चलते SI भर्ती-2021 (SI recruitment) को रद्द कर दिया। 3.8 लाख अभ्यर्थियों वाली इस भर्ती पर कोर्ट ने कहा कि दूषित प्रक्रिया को जारी नहीं रखा जा सकता।

जयपुर 

राजस्थान की सबसे चर्चित और विवादों में घिरी पुलिस भर्तियों में से एक SI भर्ती-2021 आखिरकार न्यायालय की कसौटी पर टिक नहीं सकी। राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने शनिवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए पूरी भर्ती प्रक्रिया को ही रद्द कर दिया।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस.पी. शर्मा की खंडपीठ ने यह कहते हुए राज्य सरकार और चयनित अभ्यर्थियों की अपीलें खारिज कर दीं कि जब परीक्षा की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो जाएं और जांच में पेपरलीक तथा धांधली के ठोस प्रमाण मिलें, तो पूरी चयन प्रक्रिया को बचाना संभव नहीं रह जाता।

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दरअसल, हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 28 अगस्त 2025 को ही इस भर्ती को रद्द कर दिया था। उस फैसले को चुनौती देते हुए सरकार और चयनित अभ्यर्थियों ने खंडपीठ में अपील दायर की थी, लेकिन अब खंडपीठ ने भी एकलपीठ के तर्कों को सही मानते हुए भर्ती निरस्त करने के आदेश को बरकरार रखा है।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यदि चयन प्रक्रिया ‘दूषित’ हो जाए तो इससे उन हजारों ईमानदार अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होता है जिन्होंने निष्पक्ष तरीके से परीक्षा दी थी। इसलिए पूरी प्रक्रिया को खत्म करना ही न्यायसंगत रास्ता है।

हालांकि कोर्ट ने युवाओं के हितों को देखते हुए एक राहत भी दी है। आदेश में कहा गया है कि जब भी यह भर्ती दोबारा आयोजित होगी, तब इस प्रक्रिया में शामिल सभी अभ्यर्थियों को आयु सीमा में छूट दी जाएगी। इससे वे अभ्यर्थी भी दोबारा मौका पा सकेंगे जो लंबी कानूनी लड़ाई के दौरान ओवरएज हो गए हैं।

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यह भर्ती करीब 800 से ज्यादा पदों के लिए निकाली गई थी। लिखित परीक्षा में लगभग 3 लाख 80 हजार अभ्यर्थी शामिल हुए थे। इनमें से 20 हजार 359 अभ्यर्थी फिजिकल टेस्ट तक पहुंचे और 3 हजार 291 अभ्यर्थियों ने इंटरव्यू दिया था। इसके बाद 1 जून 2023 को फाइनल परिणाम जारी किया गया था।

लेकिन रिजल्ट आने के बाद ही परीक्षा में बड़े स्तर पर पेपरलीक और धांधली के आरोप सामने आए। जांच एसओजी को सौंपी गई, जिसमें आरपीएससी से जुड़े नाम भी सामने आए। मामले में आयोग के सदस्य रामूराम राईका और बाबूलाल कटारा की गिरफ्तारी भी हुई, जिसके बाद विवाद और गहराता चला गया।

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इस भर्ती को रद्द करने की मांग को लेकर 13 अगस्त 2024 को याचिका दायर की गई थी। लंबी सुनवाई के बाद एकलपीठ ने भर्ती रद्द कर दी थी। फिर मामला खंडपीठ और बाद में सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने चयनित अभ्यर्थियों की फील्ड पोस्टिंग पर रोक लगाते हुए हाईकोर्ट से तीन महीने में फैसला करने को कहा था।

अब खंडपीठ के अंतिम फैसले के साथ ही यह बहुचर्चित भर्ती पूरी तरह खत्म हो गई है। इसके साथ ही राज्य सरकार और RPSC के सामने नई परीक्षा आयोजित करने की चुनौती खड़ी हो गई है।

यह भी साफ हो गया है कि पुलिस महकमे में सब इंस्पेक्टरों की कमी फिलहाल बनी रहेगी, जबकि लाखों अभ्यर्थियों को एक बार फिर नई परीक्षा का इंतजार करना होगा।

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