मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (CM Bhajanlal Sharma) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए 24 मामलों का निस्तारण किया। अभियोजन स्वीकृति, धारा 17-ए, पेंशन व वेतन पर कार्रवाई से अफसरशाही में हड़कंप।
जयपुर
भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का संदेश देते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अफसरशाही पर सीधा और सख्त प्रहार किया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर 24 गंभीर प्रकरणों का एक साथ निस्तारण किया गया, जिसमें अभियोजन स्वीकृति, धारा 17-ए के तहत जांच, अनिवार्य सेवानिवृत्ति और विभागीय कार्रवाई जैसे कठोर फैसले शामिल हैं। चिकित्सा, उद्योग, सार्वजनिक निर्माण विभाग सहित कई महकमे इस कार्रवाई की जद में आए हैं और कई अधिकारियों पर वर्षों की सेवा के बाद भी कड़ी प्रशासनिक चोट पड़ी है।
अनैतिक लाभ लेने वालों पर सीधा मुकदमा
मुख्यमंत्री ने पद का दुरुपयोग कर निजी लाभ लेने के मामलों में एक वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी और उद्योग विभाग के वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अभियोजन स्वीकृति जारी कर दी है। यानी अब ये मामले केवल फाइलों में नहीं, बल्कि अदालत की चौखट तक जाएंगे।
वहीं सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के तीन अधिकारियों पर सड़क निर्माण में ठेकेदार से मिलीभगत कर सरकारी धन से अवैध लाभ पहुंचाने के आरोपों को गंभीर मानते हुए कार्रवाई की गई है।
रिटायरमेंट के बाद भी नहीं मिली राहत
सरकारी जमीन को लेकर किए गए खेल पर भी सरकार ने आंख नहीं मूंदी। कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर राजकीय भूमि की खातेदारी देने के मामले में एक सेवानिवृत्त आरएएस अधिकारी के खिलाफ धारा 17-ए के तहत विस्तृत जांच को हरी झंडी दी गई है।
इसके साथ ही चार अधिकारियों की वार्षिक वेतन वृद्धि रोकी गई, जबकि पांच सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन पर शास्ति लगाई गई है।
सरकार पहले ही कई मामलों में अधिकारियों पर सख्ती दिखा चुकी है और अब एक बार फिर दो टूक कर दिया गया है कि सुशासन, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार-मुक्त प्रशासन कोई नारा नहीं, बल्कि नीति है।
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