कुष्ठ रोग पर डर की दीवार तोड़ने की तैयारी | DMA इंडिया की राष्ट्रीय पोस्टर प्रतियोगिता, मेडिकल छात्र और डॉक्टर बनेंगे बदलाव की आवाज

विश्व कुष्ठ रोग दिवस पर DMA इंडिया ने राष्ट्रीय स्तर की पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित की। मेडिकल छात्रों और डॉक्टरों की भागीदारी से कुष्ठ रोग को लेकर जागरूकता, उपचार और भेदभाव खत्म करने का संदेश दिया जाएगा।

नई दिल्ली 

कुष्ठ रोग को लेकर समाज में जमी सदियों पुरानी गलतफहमियों पर अब पोस्टर नहीं, सीधा प्रहार किया जाएगा। विश्व कुष्ठ रोग दिवस के मौके पर डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन (DMA इंडिया) ने इस बार जागरूकता को भाषणों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि देशभर के मेडिकल छात्रों और डॉक्टरों को कैनवास और रंगों के जरिए सामाजिक सोच बदलने की चुनौती दी है।

DMA इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास और राष्ट्रीय महासचिव डॉ. शुभ प्रताप सोलंकी के नेतृत्व में एक राष्ट्रीय स्तर की पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। इस पहल का मकसद साफ है—कुष्ठ रोग को लेकर फैले डर, भ्रम और सामाजिक दूरी को तोड़ना, साथ ही यह संदेश देना कि यह बीमारी लाइलाज नहीं, बल्कि समय पर पहचान और उपचार से पूरी तरह ठीक होने योग्य है।

इस प्रतियोगिता में एमबीबीएस छात्र, इंटर्न, पीजी स्टूडेंट्स और प्रैक्टिसिंग डॉक्टर हिस्सा ले सकते हैं। प्रतिभागियों को कुष्ठ रोग से जुड़ी जागरूकता, रोकथाम, उपचार, सामाजिक समावेशन और भेदभाव के खिलाफ संदेश देने वाले पोस्टर तैयार करने होंगे। पोस्टर जमा करने की अंतिम तिथि 27 जनवरी तय की गई है।

प्रतियोगिता का ढांचा

प्रतियोगिता का स्वरूप पूरी तरह शैक्षणिक और सामाजिक सरोकारों से जुड़ा रखा गया है।

  • प्रतिभागी: मेडिकल छात्र एवं चिकित्सक
  • थीम: कुष्ठ रोग—जागरूकता, रोकथाम, उपचार और सामाजिक स्वीकार्यता
  • आयोजक: DMA इंडिया
  • सम्मान: विजेताओं को आकर्षक पुरस्कार और सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र

इस राष्ट्रीय जन-जागरूकता अभियान का संचालन डॉ. आस्था सिंह चौहान कर रही हैं। कार्यक्रम से जुड़े भुगतान और समन्वय की जिम्मेदारी डॉ. तोशी निभा रही हैं। वहीं पूरे आयोजन की डिज़ाइनिंग, पोस्टर फॉर्मेट और तकनीकी तैयारी की कमान डॉ. आर्यन श्रीवास्तव के हाथों में है।

DMA इंडिया को संगठनात्मक रूप से मजबूत बनाने और इस अभियान को ज़मीनी स्तर तक पहुंचाने में डॉ. भारत गुप्ता और डॉ. स्पर्श सेठ की भूमिका को भी बेहद अहम माना जा रहा है।

इसके अलावा डॉ. कमल सिंह, डॉ. कृतिका, डॉ. पूजा सिन्हा, डॉ. बातुल फ़ातिमा, डॉ. मानसवी, डॉ. प्लाबन दास, डॉ. तनिषा और डॉ. प्रांशु श्रीवास्तव आयोजन टीम के सक्रिय सदस्य के रूप में लगातार योगदान दे रहे हैं।

DMA इंडिया के नेतृत्व ने इस अवसर पर साफ शब्दों में कहा कि:

  • कुष्ठ रोग संक्रामक जरूर है, लेकिन पूरी तरह इलाज योग्य है
  • समय पर पहचान और सही इलाज से मरीज सामान्य जीवन जी सकता है
  • रोग से पीड़ित लोगों के साथ भेदभाव अपराध जैसा सामाजिक पाप है
  • और सबसे अहम—जागरूकता ही इस बीमारी के खिलाफ सबसे मजबूत हथियार है

DMA इंडिया का मानना है कि जब डॉक्टर और मेडिकल छात्र खुद समाज से संवाद करेंगे, तभी डर की जगह ज्ञान, और दूरी की जगह संवेदना ले सकेगी।

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