नई दिल्ली
देश भर के कई रेलवे विद्युतीकरण प्रोजेक्ट में अंडरवेट स्टील घोटाला सामने आने के बाद भी रेलवे के किसी बड़े अफसर के खिलाफ एक्शन नहीं लिया गया है। बल्कि जिस कम्पनी ने रेलवे को अंडरवेट स्टील की सप्लाई की थी, उसे भी केवल ब्लैक लिस्ट करके छोड़ दिया गया है। वहीं विभागीय जांच के नाम पर घोटाले में लिप्त रेलवे के कई अफसर को सिर्फ चार्जशीट थमा कर मामला दबा दिया गया है। इनमें से कई अफसर रिटायर भी हो चुके।
दरअसल CBI जम्मू से उधमपुर के बीच रेलवे विद्युतीकरण प्रोजेक्ट में करोड़ों रुपयों के घोटाले की जांच कर रही थी और उसमें उसने अंबाला, जम्मू और दिल्ली के करीब तीस रेल अधिकारियाें से पूछताछ की थी। इसी दौरान CBI को जम्मू से कटरा तक विद्युतीकरण में पटरी किनारे लगे खंभों में अंडरवेट स्टील का घोटाला भी पकड़ में आ गया। लेकिन इसके बाद अंडरवेट स्टील की सप्लाई करने वाली कम्पनी के खिलाफ सिर्फ उसे ब्लैकलिस्ट में डालने तक का ही एक्शन हुआ। रेलवे के जिन अफसरों ने अंडरवेट स्टील का सौदा कर यात्रियों की जान जोखिम में डाली,उसके खिलाफ कोई एक्शन नहीं हुआ। सिर्फ चार्जशीट थमाकर खानापूर्ति कर दी गई।
सूत्रों के अनुसार रेलवे बोर्ड के कुछ पूर्व सदस्यों की मेहरबानी के चलते मामला दबा दिया गया। मामला सीधा यात्रियों की संरक्षा और भ्रष्टाचार से जुड़ा होने के बावजूद इसे विभागीय जांच तक ही सीमित कर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। रेलवे बोर्ड में पूर्व मेंबर इलेक्ट्रिकल भ्रष्ट अधिकारियों पर मेहरबान रहे, जिसके चलते मामले को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) तक जाने नहीं दिया गया। अब तो घोटाले में लिप्त अधिकारी सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं।
यह घोटाला जम्मू से ऊधमपुर, ऊधमपुर से कटरा, गाजियाबाद से मुरादाबाद और कोझिकोड से कन्नूर सेक्शनों में हुआ है। मामला सामने आने के बाद रेलवे बोर्ड की विजिलेंस ने जांच की और पाया कि कंपनी ने अंडरवेट स्टील की सप्लाई की। जम्मू से कटरा तक विद्युतीकरण का टेंडर अंबाला छावनी स्थित मुख्य परियोजना निदेशक (सीपीडी) कार्यालय की ओर किया गया था। जानकारी मिली है कि अंडरवेट स्टील का यह घोटाला देश के कई रेलवे प्रोजेक्टों में हुआ है।
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